आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा काट रहा अधिकारी दोषमुक्त
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा काट रहा अधिकारी दोषमुक्त
प्रयागराज, 25 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत दोषी करार पीतांबर दास को दोषमुक्त करार दिया है।
न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने निचली अदालत द्वारा 20 मई 1988 को दी गई दो साल की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा को रद्द कर दिया। यह मामला साल 1984 का है, जब बिसौली स्थित गेहूं खरीद केंद्र के प्रभारी पीतांबर दास पर निरीक्षण के दौरान 12 क्विंटल गेहूं अतिरिक्त रखने का आरोप लगा था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि भौतिक सत्यापन के दौरान स्टॉक रजिस्टर की तुलना में गेहूं की मात्रा अधिक पाई गई थी।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह स्पष्ट करने में विफल रहा कि आरोपित ने किस विशिष्ट 'कंट्रोल ऑर्डर' यानी नियंत्रण आदेश का उल्लंघन किया था। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 के तहत दंडात्मक कार्यवाही तभी की जा सकती है जब धारा 3 के तहत जारी किसी विशिष्ट आदेश का उल्लंघन साबित हो। इस मामले में अभियोजन ने न तो किसी नियंत्रण आदेश का उल्लेख किया और न ही यह साबित कर पाया कि आरोपित किसी लाइसेंसिंग शर्त के दायरे में आता था। इसके अलावा, गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए और गेहूं की ग्रेडिंग व जांच प्रक्रिया में भी कई खामियां उजागर हुईं।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक मामलों में 'मेन्स रीया' यानी आपराधिक मंशा एक अनिवार्य तत्व है, जिसे साबित करने में अभियोजन पूरी तरह विफल रहा। कोर्ट ने माना कि केवल अतिरिक्त गेहूं मिलना सजा का आधार नहीं हो सकता जब तक कि यह किसी कानूनी आदेश का उल्लंघन न हो। इन्हीं आधारों पर अदालत ने अपीलकर्ता को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।