'मेडिकल एल्ट्रिज़्म' पर प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, अंगदान से जीवन बचाने का दिया संदेश

'मेडिकल एल्ट्रिज़्म' पर प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, अंगदान से जीवन बचाने का दिया संदेश

'मेडिकल एल्ट्रिज़्म' पर प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, अंगदान से जीवन बचाने का दिया संदेश

लखीमपुर खीरी, 25 अप्रैल । चिकित्सा क्षेत्र में परोपकार और अंगदान की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, देवकली में 'मेडिकल एल्ट्रिज़्म (परोपकारार्थमिदं शरीरम्)' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज शनिवार को हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सदर विधायक योगेश वर्मा, श्रीनगर विधायक मंजू त्यागी, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह और महाविद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. वाणी गुप्ता सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया।

प्रधानाचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि यह उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा सम्मेलन है जो परोपकार जैसे मानवीय विषय पर केंद्रित है। उन्होंने 'ब्रेन डेड' घोषित युवा हरीश राणा का उदाहरण दिया, जिनके परिवार ने मृत्यु पश्चात अंग और ऊतक दान कर देश में अंगदान की एक नई मिसाल पेश की थी। सम्मेलन में देशभर से आए 567 प्रतिभागी अंगदान के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझेंगे।

कैम्ब्रिज और एसजीपीजीआई के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

यूनाइटेड किंगडम की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल से आए डॉ. अभिषेक रे ने आंतों के ट्रांसप्लांट की जटिलताओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सहभागिता से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। वहीं, एसजीपीजीआई लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. जिया हाशिम ने 'ब्रेन डेड' की स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद कानूनी रूप से इसे मृत्यु ही माना जाता है।

एसजीपीजीआई के प्रोफेसर डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने चिकित्सा क्षेत्र में कानूनी अवधारणाओं जैसे लापरवाही, लायबिलिटी और रोगी-डॉक्टर गोपनीयता पर मार्गदर्शन दिया। किडनी प्रत्यारोपण की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए चरक अस्पताल के डॉ. विष्णु शंकर शुक्ला ने जीवित डोनर की उपलब्धता और चयन के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए। मेदांता लखनऊ के डॉ. अंशुल गुप्ता ने बोन मैरो प्रत्यारोपण और डॉ. अरुणा सिंह ने परोपकार के न्यूरोफिजियोलॉजी पर विचार रखे।

अयोध्या मेडिकल कॉलेज की डॉ. वंदना गुप्ता ने सरोगेसी (किराये की कोख) को चिकित्सा का परोपकारी रूप बताते हुए कहा कि यह निसंतान जोड़ों के लिए आशा की किरण है। इसके साथ ही 'मोहन फाउंडेशन' द्वारा एमबीबीएस प्रशिक्षुओं के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

इस सम्मेलन को नाटो (NOTTO) ने सराहा है और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) द्वारा क्रेडिट पॉइंट भी दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने भी संदेश भेजकर कार्यक्रम को अपनी शुभकामनाएं दीं। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।