शस्त्र नियम, 2016 के तहत नियम 32 का उल्लंघन साबित किए बिना बंदूक का लाइसेंस रद्द नहीं : उच्च न्यायालय

शस्त्र नियम, 2016 के तहत नियम 32 का उल्लंघन साबित किए बिना बंदूक का लाइसेंस रद्द नहीं : उच्च न्यायालय

शस्त्र नियम, 2016 के तहत नियम 32 का उल्लंघन साबित किए बिना बंदूक का लाइसेंस रद्द नहीं : उच्च न्यायालय

प्रयागराज, 01 दिसम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा कि शस्त्र नियम 2016 के नियम 32 के अनुसार, यह आवश्यक है कि न्यायिक प्राधिकारी किसी शस्त्र लाइसेंस को रद्द करने से पहले यह तय करे कि सम्बंधित नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि “नियम 32 को पढ़ने से स्पष्ट है कि नियम 32 के तहत किसी लाइसेंस को रद्द करने से पहले, यह आवश्यक है कि प्राधिकारी इस बारे में अपनी राय बनाए कि क्या किसी लाइसेंसी हथियार को उचित सुरक्षा उपकरणों के साथ नहीं रखा गया था या उसे लहराया गया था, छोड़ा गया था या किसी सार्वजनिक स्थान या हथियार मुक्त क्षेत्र में कोई खाली गोलीबारी हुई थी। इस तरह के विचार और राय नियम, 2016 के तहत नियम 32 में लागू करने के लिए अनिवार्य हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह याची योगेन्द्र प्रसाद की याचिका पर दिया है। याची को 16 जुलाई 2005 को रिवॉल्वर का लाइसेंस प्रदान किया गया था। हालांकि, 22 सितम्बर 2020 के नोटिस द्वारा, गाजीपुर के डीएम ने उक्त लाइसेंस निलम्बित कर दिया और याचिकाकर्ता को अपना असलहा जमा करने का निर्देश दिया। याची ने आरोपों का खंडन करते हुए जवाब दिया। लेकिन 17 अगस्त 2020 को, गाजीपुर के एसएचओ ने हथियार अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद याची ने कमिश्नर, वाराणसी के समक्ष अपील दायर की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। व्यथित होकर याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

न्यायालय ने शस्त्र नियम, 2016 का अवलोकन किया। नियम 32 की जांच के बाद न्यायालय ने माना कि धारा 32 के तहत लाइसेंस रद्द करने की एक अनिवार्य शर्त यह थी कि न्याय निर्णायक प्राधिकारी को लाइसेंस रद्द करने से पहले यह निर्धारित करना होगा कि क्या उपरोक्त शर्तों का उल्लंघन हुआ है। याची के मामले में न्यायालय ने पाया कि प्राधिकारी ने ऐसा कोई उपाय नहीं किया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश में ऐसा कोई निष्कर्ष स्पष्ट रूप से अनुपस्थित है और इसलिए, केवल इसी आधार पर डीएम का आदेश रद्द किए जाने योग्य है। नियम 32 के अंतर्गत किस उप-नियम का उल्लंघन याचिकाकर्ता द्वारा किया जा रहा है, यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किए बिना, याचिकाकर्ता पर उसका लाइसेंस रद्द करने और उसके हथियार को जब्त करने का दायित्व नहीं डाला जा सकता। हाईकोर्ट ने तदनुसार आदेश को रद्द कर दिया और याचिका को स्वीकार कर लिया।