वैधानिक विवाह आयु से कम के साथ लिव इन रिलेशनशिप को संरक्षण नहीं: हाईकोर्ट
वैधानिक विवाह आयु से कम के साथ लिव इन रिलेशनशिप को संरक्षण नहीं: हाईकोर्ट
प्रयागराज, 14 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि लिव इन रिलेशनशिप में किसी एक साथी की उम्र वैधानिक विवाह आयु से कम है, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे संबंध को संरक्षण नहीं दे सकती। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के तहत सुरक्षा मिलती रहेगी।
जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ एक 20 वर्षीय मुस्लिम महिला और 19 वर्षीय हिंदू युवक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों ने दावा किया था कि वे लिव इन रिलेशनशिप में हैं और महिला के परिवार से उन्हें खतरा है।कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष तय है। ऐसे में 21 वर्ष से कम उम्र का पुरुष विवाह के लिए कानूनी क्षमता नहीं रखता। पीठ ने कहा कि यदि कोई जोड़ा इसलिए लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा है, क्योंकि कानून उन्हें अभी विवाह की अनुमति नहीं देता, तो ऐसे संबंध को संरक्षण देना अप्रत्यक्ष रूप से एक “अवैध विवाह-सदृश व्यवस्था” को मान्यता देना होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि माता-पिता या बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत अधिकारी को कानून के तहत कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता, बशर्ते वे कानून के दायरे में रहें। याचिका में खतरे से जुड़ी कोई ठोस जानकारी न होने और युवक की उम्र 21 वर्ष से कम होने के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।