पशुधन सुरक्षा सुनिश्चित: राष्ट्रीय रोग नियंत्रण योजना के तहत 23 जुलाई से शुरू होगा खुरपका-मुंहपका रोग का वृहद टीकाकरण अभियान

पशुधन सुरक्षा सुनिश्चित: राष्ट्रीय रोग नियंत्रण योजना के तहत 23 जुलाई से शुरू होगा खुरपका-मुंहपका रोग का वृहद टीकाकरण अभियान

पशुधन सुरक्षा सुनिश्चित: राष्ट्रीय रोग नियंत्रण योजना के तहत 23 जुलाई से शुरू होगा खुरपका-मुंहपका रोग का वृहद टीकाकरण अभियान

प्रयागराज, 18 जुलाई । पशुधन के स्वास्थ्य और उत्पादकता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण योजना (National Animal Disease Control Programme) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण टीकाकरण अभियान की शुरुआत 23 जुलाई से होने वाली है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारी 'खुरपका-मुंहपका' (Foot and Mouth Disease - FMD) पर प्रभावी नियंत्रण पाना है। प्रयागराज के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिवनाथ यादव ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित अभियान की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

खुरपका-मुंहपका रोग का गंभीर प्रभाव: डॉ. यादव ने बताया कि खुरपका-मुंहपका रोग, जिसे आमतौर पर 'एफएमडी' के नाम से जाना जाता है, हालांकि पशुओं में मृत्यु दर का कारण कम बनता है, लेकिन इसका आर्थिक प्रभाव अत्यंत गंभीर होता है। यह बीमारी संक्रमित पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है, उनकी कार्यक्षमता (जैसे कृषि कार्यों में उपयोग) को कम करती है, और प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक असर डालती है। नतीजतन, पशुधन की उत्पादकता में भारी गिरावट आती है, जिससे पशुपालकों को अत्यधिक आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है और स्वस्थ पशु भी बीमारी के कारण अनुपयोगी हो जाते हैं।

अभियान का दायरा और लक्ष्य: इस व्यापक टीकाकरण अभियान के तहत प्रयागराज जिले के समस्त गोवंश (गाय और बछड़े) और भैंस वंश (भैंस और पड़वे) का टीकाकरण किया जाएगा। विभाग के पास कुल 12 लाख 25 हजार वैक्सीन की खुराकें उपलब्ध हैं, जो इस अभियान के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, टीकाकरण के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरती जाएंगी। 4 माह से कम उम्र के बछड़ों/पड़वों (नवजात) और 8 माह से अधिक की गर्भवती गायों व भैंसों को फिलहाल यह टीका नहीं लगाया जाएगा, ताकि उनके स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। इन विशिष्ट मामलों को छोड़कर, अन्य सभी स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

तैयारियां और कार्यप्रणाली: इस महाअभियान के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ग्राम-वार विस्तृत रोस्टर तैयार कर लिया गया है, ताकि कोई भी क्षेत्र या पशु न छूटे। यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी वैक्सीन खुराकें 'कोल्ड चेन' (शीत श्रृंखला) के अंतर्गत सुरक्षित रूप से रखी गई हैं, जिससे उनकी प्रभावशीलता बनी रहे। टीकाकरण दल (वैक्सीनेशन टीम) पशुपालकों के घर-घर जाकर यह कार्य करेंगे और यह प्रक्रिया अगले 45 दिनों तक जारी रहेगी। पारदर्शिता और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए, टीकाकरण की तिथि से एक दिन पूर्व संबंधित ग्राम सभा के जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में विस्तृत सूचना प्रदान कर दी जाएगी, ताकि वे पशुपालकों को जागरूक कर सकें और अभियान में सहयोग कर सकें।

पशुपालकों से अपील और अपेक्षित लाभ: यह टीकाकरण वर्ष में दो बार किया जाता है, जो पशुओं को इस बीमारी से दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक है। डॉ. यादव ने बताया कि इस बीमारी के सामूहिक टीकाकरण से न केवल घरेलू स्तर पर पशुधन की उत्पादकता बेहतर होगी, बल्कि विदेशों में भारतीय दुग्ध उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी, जिससे देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने समस्त पशुपालक भाइयों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करें। ग्राम पंचायतों में आने वाली टीकाकरण टीम का पूरा समर्थन करें, अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाएं। इसके अतिरिक्त, जिन मवेशियों पर अभी तक पहचान टैग (ear tag) नहीं लगा है, टीकाकरण से पहले उन पर टैग लगवाना अनिवार्य होगा, ताकि प्रत्येक पशु की पहचान और टीकाकरण रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखा जा सके। यह अभियान पशुधन के स्वास्थ्य और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा।