जिन नियुक्तियों में चयन प्रक्रिया का पालन नहीं, वह अवैध मानी जाएगी : हाईकोर्ट
जिन नियुक्तियों में चयन प्रक्रिया का पालन नहीं, वह अवैध मानी जाएगी : हाईकोर्ट
प्रयागराज, 28 अप्रैल । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि जिन नियुक्तियां में निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है वे अवैध मानी जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने लक्ष्मी शंकर तिवारी व एक अन्य की याचिका पर दिया है।
इसी के साथ कोर्ट ने वाराणसी के एक जूनियर हाईस्कूल के दो कर्मचारियों की याचिका खारिज करते हुए उनकी नियुक्ति को अवैध करार दिया है। याचियों ने बेसिक शिक्षा निदेशक के 20 दिसंबर 2014 के आदेश को चुनौती दी थी। साथ ही वेतन भुगतान और सेवा में हस्तक्षेप न करने की मांग की थी। याचियों का दावा था कि वे 1980 से विद्यालय में चपरासी व लिपिक पद पर कार्यरत हैं।
उनकी नियुक्ति को बाद में गलत तरीके से बदला गया है। कोर्ट ने कहा कि याचियों के दावों में गंभीर विरोधाभास है। पहले उन्होंने नियुक्ति वर्ष 1977 बताया, बाद में इसे 1980 कर दिया। कोर्ट ने इसे तथ्य छिपाने और गुमराह करने का प्रयास बताया। साथ ही कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत मांगने वाले को स्वच्छ हाथों के साथ आना चाहिए लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
कोर्ट ने कहा कि एक याची की नियुक्ति उस समय हुई, जब उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। नाबालिग की नियुक्ति कानूनन पूरी तरह अवैध व शून्य होती है।कोर्ट ने यह भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में आवश्यक नियमों जैसे विज्ञापन जारी करना, चयन समिति का गठन और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का पालन नहीं किया गया। ऐसे में नियुक्ति वैध नहीं मानी जा सकती। साथ ही रिकॉर्ड में प्रस्तुत कागजात में भी विसंगतियां पाई गईं। एक ही संदर्भ संख्या वाले विभिन्न कागजात में अलग-अलग जानकारी होने से उनकी प्रामाणिकता पर सवाल उठे। कोर्ट ने इसे संभावित हेरफेर और फर्जीवाड़े का संकेत माना।साथ ही कहा कि जब तक नियुक्ति वैध और स्वीकृत न हो, तब तक राज्य सरकार से वेतन का दावा नहीं किया जा सकता। याची अपनी नियुक्ति की वैधता साबित नहीं कर सके इसलिए वे वेतन के हकदार नहीं हैं।