1986 के मुकदमे के गायब रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश
1986 के मुकदमे के गायब रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश

प्रयागराज, 17 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीडीसी जौनपुर को 1986 के एक मुकदमे के गायब रिकॉर्ड तलाश कराकर उन्हें 15 दिन के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर को भी मामले की जांच करने के अलावा गायब रिकॉर्ड का पता लगाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने मंगलेश व चार अन्य की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ताओं के अनुसार चकबंदी अधिकारी सदर जौनपुर के न्यायालय से वाद संख्या 912 से 924 सन 1986 (रामप्यारे बनाम सितई) में एकपक्षीय आदेश हुआ था। जिसके विरुद्ध याचियों ने रेस्टोरेशन अर्जी दी। अर्जी पर सुनवाई करते हुए चकबंदी अधिकारी न्यायालय ने उक्त आदेश स्थगित कर दिया। जिस पर यथास्थिति का आदेश भी रहा और यह आदेश छह अप्रैल 2019 तक चलता रहा।
इस पर हाईकोर्ट ने याची के वकीलों से पूछा कि जब अंतरिम आदेश प्राप्त है तो इस याचिका का क्या उद्देश्य है। इस पर वकीलों ने कहा कि याची अपने पुरखे, पुरनियों के समय से कब्जे में चले आ रहे हैं लेकिन विपक्षियों ने एक अप्रैल 2010 के आदेश का दुरुपयोग करते हुए अपना नाम रिकॉर्ड्स पर दर्ज करा लिया है। इससे भ्रामक स्थिति उत्पन्न हो गई है और विपक्षी इसी का गलत लाभ उठाने की कोशिश में लगे रहते हैं।
परिणामस्वरूप आए दिन मारपीट, झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। साथ ही चकबंदी अधिकारी सदर जौनपुर के न्यायालय से फ़ाइल गायब होने के कारण मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस पर कोर्ट ने डिप्टी डॉयरेक्टर ऑफ कंसोलिडेशन/कलेक्टर जौनपुर को 15 दिन के भीतर उक्त मुकदमे के ग़ायब रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश देने के साथ पुलिस अधीक्षक जौनपुर को भी गायब रिकॉर्ड का पता लगाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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