बिजली बिल राहत योजना का असर: 15 दिन में 24 करोड़ की वसूली, लाखों बकायेदार आए लाइन में

बिजली बिल राहत योजना का असर: 15 दिन में 24 करोड़ की वसूली, लाखों बकायेदार आए लाइन में

बिजली बिल राहत योजना का असर: 15 दिन में 24 करोड़ की वसूली, लाखों बकायेदार आए लाइन में

बरेली, 17 दिसंबर  । उत्तर प्रदेश के बरेली में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई बिजली बिल राहत योजना–2025 जिले में उम्मीद से कहीं अधिक प्रभावी साबित हो रही है। योजना शुरू होते ही वर्षों से बकाया दबाए बैठे उपभोक्ता भी आगे आने लगे हैं। ब्याज में 100 फीसदी माफी और मूलधन पर छूट ने ऐसे उपभोक्ताओं को भी राहत दी है, जो अब तक बिजली विभाग के लिए चुनौती बने हुए थे।

बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच जिले में 24 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई है। यह राशि उन उपभोक्ताओं से प्राप्त हुई है, जिन्हें अब तक ‘नेवर पेड’ और ‘लॉन्ग अनपेड’ श्रेणी में रखा गया था। खास बात यह है कि 1.37 लाख नेवर पेड उपभोक्ताओं ने पहली बार बिजली बिल जमा किया, जबकि 1.83 लाख लॉन्ग अनपेड उपभोक्ताओं ने वर्षों पुराना बकाया निस्तारित किया। इसके साथ ही बिजली चोरी के मामलों में चिह्नित 7205 उपभोक्ताओं ने भी योजना का लाभ उठाते हुए बकाया और जुर्माना जमा किया।

मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि योजना को सफल बनाने के लिए विभाग ने व्यापक अभियान चलाया है। टीमें गांव-गांव और मोहल्लों में पहुंचकर उपभोक्ताओं को योजना की जानकारी दे रही हैं। कैंप लगाकर मौके पर ही पंजीकरण, बिल संशोधन और भुगतान की सुविधा दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि यह योजना 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में लागू रहेगी। पहले चरण में ब्याज पर 100 फीसदी माफी और मूलधन पर 25 प्रतिशत छूट, दूसरे चरण में 20 प्रतिशत और तीसरे चरण में 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं बिजली चोरी के मामलों में पहले चरण में राजस्व निर्धारण राशि पर 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।

योजना का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है, जिसके लिए 2000 रुपये की धनराशि जमा करनी होगी। पंजीकरण UPPCL की वेबसाइट, कंज्यूमर ऐप, विभागीय कार्यालय, जन सेवा केंद्र, फिनटेक प्रतिनिधि और मीटर रीडर के माध्यम से कराया जा सकता है।

बिजली विभाग ने शेष बकायेदारों से अपील की है कि वे समय रहते योजना का लाभ उठाकर बकाया जमा करें, ताकि भविष्य में कार्रवाई से बचते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।