पुलिस कमिश्नर आगरा से हाईकोर्ट ने पूछा, 2009 से गैर जमानती वारंट पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर आगरा से हाईकोर्ट ने पूछा, 2009 से गैर जमानती वारंट पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर आगरा से हाईकोर्ट ने पूछा, 2009 से गैर जमानती वारंट पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई

प्रयागराज, 27 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा के पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। पूछा है कि 2009 में जारी गैर जमानती वारंट का तामीला क्यों नहीं किया जा सका।

यह आदेश न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने कड़े सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है।

आगरा के तत्कालीन जेलर कड़े सिंह जिनके विरुद्ध वर्ष 2009 से गैर-जमानती वारंट और कुर्की कार्यवाही लम्बित चल रही है। उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की है।

मामले के अनुसार, वर्ष 2008 में पुलिस चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए याची को सम्मन जारी किया। 8 अप्रैल 2009 को पहली बार गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। 10 फरवरी 2012 को संबंधित न्यायालय ने जमानत बॉन्ड जब्त कर पुनः धारा 82-83 की कार्यवाही शुरू की और गृह सचिव, उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर आवेदक को गिरफ्तार कराने का अनुरोध किया।

याची अधिवक्ता का कहना था कि उसके इन आदेशों की कोई जानकारी नहीं थी। नवम्बर 2025 में जब वे ट्रेजरी में जीवन प्रमाण पत्र जमा करने गए, तब एक सहकर्मी से इस मामले का पता चला। इसके बाद उन्होंने तत्काल संबंधित न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे 15 दिसम्बर 2025 को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया कि गैर-जमानती वारंट और धारा 82-83 की कार्यवाही पहले से लंबित है।

न्यायालय ने कहा याची एक सरकारी कर्मचारी था, उसके निवास और कार्यस्थल की जानकारी अधिकारियों को थी, फिर भी 2009 से लेकर अब तक वारंट और कार्यवाही निष्पादित क्यों नहीं हो सकी।

न्यायालय ने पुलिस आयुक्त, आगरा को जांच कर व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 5 जून 2026 को निर्धारित की गई है।

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