रामकथा के श्रवण से मन के राग, द्वेष, ईर्ष्या, भेदभाव स्वतः समाप्त होते हैं : आचार्य व्योम त्रिपाठी
रामकथा के श्रवण से मन के राग, द्वेष, ईर्ष्या, भेदभाव स्वतः समाप्त होते हैं : आचार्य व्योम त्रिपाठी
मुरादाबाद, 03 नवम्बर । कुंज बिहारी महिला मंडल के तत्वावधान में सिविल लाइन स्थित पुलिस लाइन मंदिर में आयोजित संगीतमय नाै दिवसीय श्री राम कथा के नवें व अंतिम दिन सोमवार को समापन हुआ। कथावाचक आचार्य व्योम त्रिपाठी ने लंका दहन, राम- रावण युद्ध, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा श्रीरामचरितमानस को अपने जीवन में उतारें। रामकथा के श्रवण से मन के राग, द्वेष, ईर्ष्या, और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यह मन को शांत कर हिंसक भावनाओं का रोकती है।
आचार्य ने कहा रामायण हमें जीने का तरीका सिखाती है। रामायण हमें आदर्श, सेवा भाव, त्याग व बलिदान के साथ दूसरों की सम्पत्ति पर हमारा कोई अधिकार नहीं है, की सीख देती है। उन्हाेंने राम नाम की महिमा बताते हुए कहा कि राम का नाम अनमोल है, यदि पापी भी राम का नाम लेता है तो उसे सदगति मिल जाती है। जिसके हृदय में प्रभु के प्रति भाव जागते हैं, जिस पर हरि कृपा होती है। वह मनुष्य ही प्रभु की कथा में शामिल होता है। श्रीराम कथा का मनोयोग से श्रवण कर उसके उपदेश को जीवन में उतारें। तभी कथा की सार्थकता है। मन व ध्यान की एकाग्रता से हर कार्य में सफलता मिलती है। भगवान का आगमन सदैव धर्म की रक्षा के लिए हुआ है। रामायण हमें समाज के संस्कार, अच्छे-बुरे की पहचान सिखाती है। सच्ची भक्ति से ही भगवान की प्राप्ति की जा सकती है।
कथा में मुख्य यजमान डॉ शशि अरोड़ा व अशोक अरोड़ा रहे। इस मौके पर कथावाचक दीपक कृष्ण उपाध्याय, निमित जायसवाल, किरन सिक्का, अनु गोयल, सीमा शर्मा, वीना सचदेवा, नीलम अग्रवाल, डॉ गीता परिहार, मानवी मुंजियाल, शिवानी शर्मा, शिक्षा गोयल, रोहिणी कंसल, मीरा गुप्ता, उमा शर्मा, शिवानी शर्मा, कंचन शर्मा, अंजू मेहरोत्रा आदि उपस्थित रहे।