उप्र निर्वाचन आयोग की सख्ती के बाद वाराणसी सहित प्रदेश भर की छोटी पार्टियों में हड़कंप, 'वोटकटवा' दलों पर गिरी गाज

उप्र निर्वाचन आयोग की सख्ती के बाद वाराणसी सहित प्रदेश भर की छोटी पार्टियों में हड़कंप, 'वोटकटवा' दलों पर गिरी गाज

लखनऊ, 23 जुलाई । उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग की कड़ी कार्रवाई और सक्रियता के बाद, वाराणसी सहित प्रदेश भर के उन छोटे और अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है, जिन्हें अक्सर "वोटकटवा" करार दिया जाता है और जो महज कागजों पर अस्तित्व में होने का आरोप झेलते हैं। निर्वाचन आयोग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ऐसे निष्क्रिय और गैर-सक्रिय राजनीतिक दलों की पहचान करना और उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर करना है, जो केवल पंजीकरण के लिए मौजूद हैं और वास्तविक राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न नहीं हैं।

लखनऊ में 23 जुलाई को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इन छोटे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। यह बैठक उन पार्टियों पर केंद्रित थी, जिनकी चुनावी प्रक्रिया में भूमिका अक्सर वोट बांटने तक सीमित मानी जाती है, जिससे मुख्य दावेदारों के लिए चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। आयोग का उद्देश्य इन पार्टियों की वास्तविक स्थिति, गतिविधियों और पंजीकरण के नियमों के पालन की जांच करना है।

बैठक में वाराणसी से कई प्रमुख छोटी पार्टियों के राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें नवजन क्रांति पार्टी, गांधी एकता पार्टी, समता समाजवादी कांग्रेस पार्टी, आजाद भारत पार्टी (यूनाइटेड) और अखिल भारतीय राष्ट्रीय परिवार पार्टी शामिल थीं। इन दलों ने आयोग के समक्ष अपनी सक्रियता और वैधानिक अनुपालना का प्रदर्शन करने का प्रयास किया।

हालांकि, वाराणसी से संचालित होने वाली कई अन्य छोटी पार्टियों के पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे, जिससे उनके भविष्य की मान्यता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। आयोग इसे गंभीरता से ले रहा है और अनुपस्थित रहने वाली पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है, जिसमें उनकी मान्यता रद्द करना भी शामिल हो सकता है।

समता समाजवादी कांग्रेस पार्टी के एक पदाधिकारी रमेश ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने बैठक के दौरान सभी उपस्थित दलों से उनके संगठनात्मक विवरण, पंजीकरण की वर्तमान स्थिति, पिछले चुनावों में प्रदर्शन, आय-व्यय का ब्यौरा, और उनकी राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी। जो पार्टियां बैठक में उपस्थित थीं, उन्होंने मौके पर ही अपने संबंधित दस्तावेज जमा कराए। शेष अनुपस्थित पार्टियों से भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक कागजात जमा कराने को कहा गया है, जिसकी विफलता पर उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। यह कदम चुनाव आयोग द्वारा दलों की सक्रियता और नियमों के पालन की पुष्टि के लिए उठाया गया है।

गौरतलब है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा बुलाई गई इस बैठक में प्रदेश भर के कुल 119 अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सुनवाई का अवसर दिया गया था। इसके बावजूद, वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश के केवल 25 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि ही इस बैठक में शामिल हुए। यह कम उपस्थिति उन आशंकाओं को बल देती है कि बड़ी संख्या में ऐसे राजनीतिक दल केवल कागजों पर ही मौजूद हैं और उनकी कोई वास्तविक चुनावी या संगठनात्मक गतिविधि नहीं है। आयोग का यह अभियान फर्जी या निष्क्रिय राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने और चुनाव को अधिक स्वच्छ व पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।