आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का लखनऊ में विधानसभा घेराव मार्च, पुलिस ने रोका

दीनदयाल उपाध्याय पार्क से निकले अभ्यर्थियों को रास्ते में रोककर बसों से ईको गार्डन भेजा गया, 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का लखनऊ में विधानसभा घेराव मार्च, पुलिस ने रोका

लखनऊ, 02 सितंबर उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बुधवार को लखनऊ केकेसी स्थिति दीनदयाल उपाध्याय पार्क से विधानसभा घेराव के लिए पैदल मार्च शुरू किया। रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। अभ्यर्थियों ने सड़क के किनारे बैठकर नारेबाजी की। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और अभ्यर्थियों को बस में भरकर धरना स्थल इको गार्डन भेज दिया। मुख्य रूप से अभ्यर्थियों की मांग है कि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराई जाए।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। आरोप है कि जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया। उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया। एक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच ने एक फैसला सुनाया और नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। कुछ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गये तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। आठ सितंबर को इस प्रकरण पर सुनवाई होनी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में हुई विसंगति को सुधार करते हुए 6800 की एक लिस्ट दी थी लेकिन उसमें शामिल अभ्यर्थियों को अभी तक नौकरी नहीं मिल सकी। इसी बात को लेकर अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार 6800 सूची में शामिल अभ्यर्थियों का बचाव करे और उन्हें नियुक्ति दिलाए। प्रदर्शन करने वालों में अवनीश यादव, यशवंत यादव, विक्रम यादव, अमित मौर्य, भोला अंबेडकर आदि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल रहे।