प्रयागराज में जमीन के नीचे मिले ₹3.20 करोड़ का रहस्य गहराया, पुणे कनेक्शन और 48 जमीनों की रजिस्ट्री जांच के घेरे में
बरईपुर रामनगर गांव में तीन ड्रमों से मिली 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये की नकदी के मामले में आयकर विभाग की जांच महाराष्ट्र तक पहुंची। पुणे में कथित नौकरी, सात बैगों में नकदी लाने के दावे और जमीनों की रजिस्ट्रियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जारी है।
# प्रयागराज में जमीन के नीचे दबे 3.20 करोड़ का रहस्य! तीन ड्रम, दो भाई और पुणे के 'सेठ' से जुड़ी कहानी
*Subheading:* प्रयागराज के बरईपुर रामनगर गांव में जमीन के नीचे तीन नीले ड्रमों से 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये की नकदी मिलने के बाद जांच का दायरा महाराष्ट्र तक पहुंच गया है। परिवार के नाम 48 जमीनों की कथित रजिस्ट्रियां, पुणे से नकदी लाए जाने का दावा और तीन पैकेटों में मिले दस्तावेज इस रहस्यमयी मामले में कई नए सवाल खड़े कर रहे हैं।
## जमीन के नीचे छिपा था करोड़ों का राज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जमीन के नीचे दबे तीन नीले ड्रमों ने एक ऐसे रहस्य को जन्म दिया है, जिसकी परतें खुलने के साथ नए सवाल सामने आ रहे हैं। नवाबगंज क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में जमीन की खुदाई के दौरान मिले इन ड्रमों में सोना-चांदी नहीं, बल्कि पांच-पांच सौ रुपये के नोटों की गड्डियां भरी थीं। गिनती पूरी होने पर कुल 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई।
लेकिन सवाल सिर्फ करोड़ों रुपये मिलने का नहीं है। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इतनी बड़ी रकम आखिर आई कहां से, इसे जमीन के नीचे क्यों छिपाया गया और इसका वास्तविक मालिक कौन है?
नकदी बरामद होने के बाद आयकर विभाग की जांच का दायरा बढ़ गया है। जांच की कड़ियां प्रयागराज से महाराष्ट्र के पुणे तक जुड़ती दिखाई दे रही हैं। मामले में राकेश यादव उर्फ महाकाल और उसके भाई राजेश यादव उर्फ बबलू की आर्थिक गतिविधियां जांच के केंद्र में हैं।
## पुणे का 'सेठ' कौन? ड्राइवर के पास करोड़ों रुपये कैसे पहुंचे?
इस मामले का सबसे रहस्यमयी पहलू महाराष्ट्र से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, राकेश यादव ने पूछताछ में बताया कि वह पुणे में एक सेठ के यहां निजी ड्राइवर के रूप में काम करता था। कोविड महामारी के दौरान वह पुणे से प्रयागराज लौट आया था।
अब जांच एजेंसियों के सामने सवाल है कि एक निजी ड्राइवर के रूप में काम करने वाले व्यक्ति के पास इतनी बड़ी नकदी कैसे पहुंची?
क्या यह रकम उसकी अपनी कमाई थी? क्या इसका संबंध पुणे के किसी कारोबारी से था? या फिर महाराष्ट्र से प्रयागराज तक हुए किसी दूसरे वित्तीय लेनदेन से इसका संबंध है?
इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए महाराष्ट्र में नौकरी की अवधि, वेतन, बैंक खातों और दूसरे संभावित आय स्रोतों की पड़ताल की जा सकती है।
फिलहाल पुणे के कथित सेठ की इस नकदी से किसी गैरकानूनी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
## सात बैगों में पुणे से प्रयागराज लाए गए थे रुपये?
इस मामले में मीडिया रिपोर्टों के जरिए एक और दावा सामने आया है। बताया गया है कि महाराष्ट्र से नकदी सात बैगों में भरकर प्रयागराज लाई गई थी।
अगर जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो सवाल उठेगा कि इतनी बड़ी रकम किस माध्यम से लाई गई? रकम को लाने में कौन-कौन शामिल था और बाद में इसे तीन ड्रमों में भरकर जमीन के नीचे क्यों छिपाया गया?
जांच एजेंसियों के लिए नकदी की आवाजाही की समयरेखा बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। बैंकिंग रिकॉर्ड, संबंधित लोगों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्य इस रहस्य को सुलझाने में मदद कर सकते हैं।
## 48 जमीनों की रजिस्ट्री ने बढ़ाया रहस्य
नकदी बरामदगी के साथ परिवार की संपत्तियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि परिवार के सदस्यों के नाम पिछले कुछ वर्षों में जमीनों की 48 रजिस्ट्रियां हुई हैं।
इनमें प्रयागराज और आसपास के इलाकों में खरीदी गई जमीनों का उल्लेख किया गया है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन जमीनों को कब खरीदा गया, उनकी वास्तविक कीमत कितनी थी और भुगतान किस स्रोत से किया गया।
क्या जमीन खरीदने के लिए महाराष्ट्र से लाई गई रकम का इस्तेमाल हुआ था? क्या इन संपत्तियों का संबंध ड्रमों में मिली नकदी से है?
फिलहाल बरामद रकम और जमीनों की खरीद के बीच कोई सीधा संबंध आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है। हालांकि, संपत्तियों के दस्तावेज और बैंक खातों का मिलान जांच की दिशा तय कर सकता है।
## तीन प्लास्टिक पैकेटों में छिपा हो सकता है अहम सुराग
इस मामले में केवल नकदी ही नहीं, बल्कि तीन प्लास्टिक पैकेटों में मिले दस्तावेज भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।
इन दस्तावेजों के जरिए जमीनों की रजिस्ट्री, वित्तीय लेनदेन और संभावित कारोबारी संबंधों की जानकारी मिल सकती है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि दस्तावेजों में दर्ज लेनदेन और बरामद नकदी के बीच कोई संबंध है या नहीं।
इन कागजातों की पूरी सामग्री सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इनसे नकदी का वास्तविक स्रोत सामने आ गया है।
## तीन ड्रम मिलने के बाद दोबारा खुदाई क्यों हुई?
तीन नीले ड्रमों से करोड़ों रुपये मिलने के बाद जमीन के दूसरे हिस्सों में भी नकदी छिपे होने की आशंका जताई गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान मकान और आसपास के संभावित स्थानों की दोबारा तलाशी ली गई। जमीन के नीचे और नकदी या महत्वपूर्ण साक्ष्य होने की संभावना की भी पड़ताल की गई।
बाद की मीडिया रिपोर्टों में खुदाई रुकवाए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं पांच ड्रमों में रकम छिपाए जाने और दो ड्रमों की रकम खर्च होने का दावा भी प्रकाशित हुआ है।
हालांकि, इस नए दावे की पूरी आधिकारिक पुष्टि और संबंधित रकम का विस्तृत हिसाब अभी स्पष्ट नहीं है।
## बैंक खातों से मोबाइल रिकॉर्ड तक जांच की संभावित कड़ियां
आयकर विभाग की जांच में राकेश यादव, राजेश यादव और संबंधित परिवार के सदस्यों की आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुणे जाने से पहले उनके पास कितनी संपत्ति थी? महाराष्ट्र में नौकरी के दौरान उनकी आय कितनी थी? कोविड के बाद प्रयागराज लौटने पर संपत्ति में कितना बदलाव हुआ?
इन सवालों के जवाब के लिए बैंक खातों में जमा-निकासी, आयकर रिटर्न, जमीनों की रजिस्ट्री, भुगतान के रिकॉर्ड और उपलब्ध मोबाइल संपर्कों की पड़ताल की जा सकती है।
जांच का एक अहम उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि बरामद