प्रयागराज : न्यूरोसर्जरी से वैस्कुलर सर्जरी तक चिकित्सा के नए आयामों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

-न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने किया सीएमई एवं व्याख्यानमाला का उद्घाटन

प्रयागराज : न्यूरोसर्जरी से वैस्कुलर सर्जरी तक चिकित्सा के नए आयामों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

प्रयागराज, 01 नवंबर। न्यूरोसर्जरी से लेकर मधुमेह, नेत्र चिकित्सा और वैस्कुलर सर्जरी तक चिकित्सा विज्ञान में तेजी से हो रहे बदलाव मरीजों के उपचार और बेहतर भविष्य की नई संभावनाएं खोल रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुभव, शोध और नई उपचार पद्धतियों का लाभ अगली पीढ़ी के चिकित्सकों तक पहुंचाना जरूरी है।

इसी उद्देश्य से रविवार को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रो. प्रीतम दास सभागार में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) एवं विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, समाज के प्रति चिकित्सकों की जिम्मेदारी और ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने वाले ऐसे आयोजनों के महत्व पर विचार रखे। मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र कल्याण संघ (एलुमनाई वेलफेयर एसोसिएशन) के तत्वावधान में आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम में चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, न्यूरोसर्जरी, मधुमेह और नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षक, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी और मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र शामिल हुए।

कार्यक्रम में चार प्रतिष्ठित चिकित्सा विभूतियों की स्मृति में विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। इनमें प्रो. एसआर सिंह, प्रो. आरके अग्रवाल, प्रो. डीबी चंद्रा और प्रो. प्रीतम दास के योगदान को याद किया गया।

न्यूरोसर्जरी और मृत्यु के बाद जीवन पर हुई चर्चा

प्रो. एसआर सिंह ओरैशन में अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ के प्रोफेसर, निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. छितिज श्रीवास्तव ने 'लाइफ आफ्टर डेथ : न्यूरोसर्जन प्रॉस्पेक्टिव' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने न्यूरोसर्जन के दृष्टिकोण से मृत्यु के बाद जीवन से जुड़े सवालों और चिकित्सा विज्ञान के नजरिये पर विचार प्रस्तुत किए। उल्लेखनीय है कि प्रो. एसआर सिंह ने एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के रूप में सेवाएं देने के साथ संस्थान में ईएनटी विभाग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों के भविष्य पर व्याख्यान

प्रो. आरके अग्रवाल ओरैशन में डायबिटीज केयर एंड रिसर्च सेंटर, प्रयागराज के निदेशक डॉ. सुबोध जैन ने 'डायग्नोसिस इज नॉट डेस्टिनी : रिडिफाइनिंग द फ्यूचर ऑफ चिल्ड्रेन विद टी-1 डी' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि टाइप-1 मधुमेह का निदान बच्चों के भविष्य की राह तय नहीं करता। उचित उपचार, नियमित देखभाल और जागरूकता से प्रभावित बच्चों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बच्चों के उपचार, जीवन की गुणवत्ता और भविष्य की संभावनाओं पर चिकित्सा संबंधी विचार साझा किए। प्रो. आरके अग्रवाल को प्रयागराज में हृदय रोग चिकित्सा के विकास और चिकित्सा शिक्षा में उनके योगदान के लिए याद किया गया।

नेत्र चिकित्सा और दृष्टि की देखभाल पर रखे विचार

प्रो. डीबी चंद्रा ओरैशन में गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, सासाराम के पूर्व कुलपति एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख डॉ. एमके सिंह ने 'विजनरी यू एंड योर विजन' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने दृष्टि की देखभाल और नेत्र स्वास्थ्य के महत्व पर अपने विचार रखे। प्रो. डीबी चंद्रा ने एमएलएन मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विभाग के विकास और नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था।

वैस्कुलर सर्जरी में प्रयागराज की भूमिका पर चर्चा

प्रो. प्रीतम दास ओरैशन में बेंगलुरु स्थित नारायणा हेल्थसिटी के वरिष्ठ परामर्शदाता एवं वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. सौरभ राय ने 'द प्रयागराज पैराडाइम : रिडिफाइनिंग ग्लोबल वैस्कुलर सर्जरी' विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों की सर्जरी के क्षेत्र में प्रयागराज की भूमिका और इस विशेषज्ञता में हो रहे बदलावों पर प्रकाश डाला। प्रो. प्रीतम दास एमएलएन मेडिकल कॉलेज में शल्य चिकित्सा के प्रोफेसर और संस्थान के प्रथम प्राचार्य रहे। उत्तर प्रदेश में शल्य चिकित्सा के विकास में उनके योगदान को याद किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन एलुमनाई वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक एवं मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. ए.के. वर्मा, अध्यक्ष डॉ. भूपेश द्विवेदी, उपाध्यक्ष डॉ. शरद जैन, सचिव डॉ. पंकज कामरा और आयोजन सचिव डॉ. अनुज गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। आयोजन समिति में कोषाध्यक्ष डॉ. बीएन गुप्ता, वैज्ञानिक अध्यक्ष डॉ. सत्विक स्वरूप, वैज्ञानिक सचिव डॉ. मोहित जैन, संयुक्त सचिव डॉ. अरुण कांत, सांस्कृतिक सचिव डॉ. राज कुमार, संपादक डॉ. राजीव वैश्य तथा जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नीरज मोहिले और डॉ. संतोष सिंह सहित एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य शामिल रहे।