सनातन संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम से प्रयागराज को बनाएंगे वैश्विक पहचान : गणेश केसरवानी

आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, डिजिटल कुंभ और रिवर फ्रंट परियोजनाओं पर श्री श्री रविशंकर से महापौर की महत्वपूर्ण मुलाकात

सनातन संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम से प्रयागराज को बनाएंगे वैश्विक पहचान : गणेश केसरवानी

प्रयागराज, 12 अगस्त । विश्व प्रसिद्ध प्रयागराज को ऐसा आधुनिक शहर बनाया जाना चाहिए, जहां सनातन संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम दिखाई दे। आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, डिजिटल कुंभ और रिवर फ्रंट जैसी परियोजनाओं के माध्यम से संगम नगरी को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यह बातें बुधवार को बेंगलुरु स्थित द आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और संस्था के अध्यक्ष एस.एस.आर.पी.एल. प्रसन्ना प्रभु से मुलाकात के दौरान प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी ने कहीं।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज की आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं और तकनीक से जोड़कर शहर की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया जा सकता है।

इसी उद्देश्य को लेकर महापौर गणेश केसरवानी ने बुधवार को बेंगलुरु स्थित द आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और संस्था के अध्यक्ष एस.एस.आर.पी.एल. प्रसन्ना प्रभु से मुलाकात की। बैठक में प्रयागराज के समग्र विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की परिकल्पना पर चर्चा

बैठक में प्रयागराज में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की स्थापना की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। इसका उद्देश्य भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, योग, ध्यान, भारतीय दर्शन, संस्कृति और जीवन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा एवं शोध से जोड़ना है।

महापौर ने कहा कि प्रयागराज जैसे आध्यात्मिक नगर में ऐसा विश्वविद्यालय देश-विदेश के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इससे संगम नगरी की पहचान वैश्विक आध्यात्मिक एवं ज्ञान नगरी के रूप में और मजबूत होगी।

डिजिटल कुंभ से दुनिया से जुड़ेगा प्रयागराज

बैठक में डिजिटल कुंभ की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। आधुनिक तकनीक, डिजिटल मंच, आभासी अनुभव और बेहतर सूचना व्यवस्था के माध्यम से कुंभ की आध्यात्मिक विरासत को देश-दुनिया के लोगों तक पहुंचाने की योजना पर चर्चा की गई।

महापौर ने कहा कि डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग से श्रद्धालुओं को स्मार्ट सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ प्रयागराज को भविष्य के आधुनिक और डिजिटल आध्यात्मिक शहर के रूप में विकसित किया जा सकता है।

गंगा-यमुना तटों के समग्र विकास पर जोर

रिवर फ्रंट परियोजना को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। महापौर ने कहा कि गंगा और यमुना के तटों का विकास केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, आध्यात्मिक गतिविधियों, जनसुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ और सुंदर नदी तट प्रयागराज के पर्यटन को नई गति देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ा सकते हैं।

द आर्ट ऑफ लिविंग ने दिखाई रुचि

महापौर की ओर से रखे गए प्रस्तावों पर द आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई। संस्था के पदाधिकारियों ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, डिजिटल कुंभ और रिवर फ्रंट जैसी योजनाओं में रुचि दिखाई तथा संभावित सहयोग और सहभागिता पर आगे विचार करने पर सहमति जताई।

महापौर ने कहा कि सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाओं, विशेषज्ञों तथा अनुभवी लोगों की सहभागिता से प्रयागराज के विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि शहर की वैश्विक पहचान मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थाओं के साथ सामाजिक एवं आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ

महापौर ने कहा कि इन परियोजनाओं का लाभ केवल आध्यात्मिक और पर्यटन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, छोटे व्यापार और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज के विकास की प्रत्येक योजना में जनसुविधा, रोजगार, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के संकल्प में प्रयागराज अपनी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप पर्यटन, निवेश, तकनीक और रोजगार को जोड़कर प्रयागराज के विकास को नई दिशा दी जा सकती है।

उन्होंने विश्वास जताया कि द आर्ट ऑफ लिविंग जैसी प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग और विशेषज्ञता से प्रयागराज के विकास की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को नई दिशा और गति मिलेगी।