केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया सारनाथ का भ्रमण, विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर जताई खुशी
पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा, विश्व धरोहर पट्टिका पर क्यूआर कोड लगाने के निर्देश
वाराणसी, 04 अगस्त । केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद यहां ऐतिहासिक सारनाथ का भ्रमण किया। इस दौरान उनके साथ यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत विशाल वी. शर्मा भी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का विश्व धरोहर सूची में शामिल होना न केवल वाराणसी, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
भ्रमण के दौरान केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने अधिकारियों को विश्व धरोहर सूची की नई पट्टिका स्थापित करने, उस पर क्यूआर कोड लगाने तथा स्मारकों के आसपास लगाए जाने वाले क्यूआर कोड में भारतीय भाषाओं के साथ प्रमुख विदेशी भाषाओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारी सहजता से उपलब्ध हो सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सारनाथ वह पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश देकर बौद्ध धर्म की आधारशिला रखी थी। यहीं से उनके विचारों का प्रसार हुआ, जिसने विश्वभर में करोड़ों लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से अब वाराणसी में पर्यटकों की संख्या में खासी वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और वैश्विक पहचान को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन) विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया गया। इसके साथ ही भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है। उल्लेखनीय है कि सारनाथ को वर्ष 1998 में यूनेस्को की संभावित (टेंटेटिव) सूची में शामिल किया गया था।
सारनाथ भ्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने पुरावशेषों एवं ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव तथा पर्यटक सुविधाओं के विस्तार को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे, कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा तथा पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।