एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, खर्च कौन उठाएगा? कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा—क्या राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल रिटेल आउटलेट संचालकों को अपने खर्च पर ANPR कैमरे लगाने के लिए बाध्य कर सकती है? मामले में सख्त कार्रवाई पर अंतरिम राहत दी गई।

एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, खर्च कौन उठाएगा? कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल

प्रयागराज, 06 अक्टूबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में सवाल उठाया कि क्या नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट मालिकों को 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (सीएक्यूएम ) के निर्देशों के तहत राज्य सरकार के आदेश के अनुसार 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (एएनपीआर) कैमरे लगाने का खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि 'गंभीर' मुद्दा यह है कि क्या राज्य सरकार का 4 जून, 2026 का पत्र, जिसमें पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट्स को 30 सितंबर, 2026 तक एएनपीआर कैमरे लगाने के लिए कहा गया है, रिटेल आउटलेट मालिकों को अपने खर्च पर कैमरे लगवाने के लिए भी बाध्य करता है।

न्यायालय पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन' की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

ज्ञात हो कि 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' ने 15 मई, 2026 को निर्देश जारी किए थे, जिनमें एनसीआर में वैध पीयूसीसी के बिना वाहनों में ईंधन भरने पर प्रतिबंध लगाया गया। ये कैमरे अधिकारियों को पेट्रोल पंप में प्रवेश करने वाले वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर की सरकारी रिकॉर्ड से जांच करने की सुविधा देते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत राज्य सरकार या तेल कंपनियां रिटेल आउटलेट मालिकों को कैमरे लगाने का खर्च उठाने के लिए मजबूर कर सकें। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें एएनपीआर कैमरे लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें इसके इंस्टॉलेशन का खर्च उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। 'उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन' ने तर्क दिया कि रिटेल आउटलेट मालिकों से खर्च उठाने के लिए कहना "अनिवार्य रूप से पैसे की वसूली" के समान है, जो उनके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 300ए और 265 का उल्लंघन होगा।

हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को 'गंभीर' माना क्योंकि उसने सवाल उठाया कि क्या एनसीआर में बीएक्यूएम के निर्देशों को लागू करने वाला राज्य सरकार का पत्र रिटेल आउटलेट मालिकों को अपने खर्च पर एएनपीआर कैमरे लगाने के लिए बाध्य कर सकता है। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए स्टैंडिंग काउंसिल ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (प्रतिवादी नंबर 15) की ओर से पेश वकील ने भी जरूरी निर्देश लेने के लिए समय मांगा है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि अधिकारी और तेल कंपनियां, रिटेल आउटलेट्स पर एएनपीआर कैमरे लगाने की 30 सितंबर की समय-सीमा को देखते हुए सख़्त कार्रवाई की धमकी दे रहे थे। इन हालात में कोर्ट ने निर्देश दिया, "05 अक्टूबर 2026 तक प्रतिवादी याचिकाकर्ता एसोसिएशन के सदस्यों के खिलाफ़ उनके रिटेल आउटलेट्स पर एएनपीआर कैमरे लगाने को लेकर कोई सख़्त कार्रवाई नहीं करेंगे।" हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर राज्य सरकार अपने खर्च पर एएनपीआर कैमरे लगाती है, तो याचिकाकर्ता एसोसिएशन के सदस्य तुरंत कैमरे लगाने में सहयोग करेंगे। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया गया कि वे इस आदेश की जानकारी खाद्य और नागरिक आपूर्ति और परिवहन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, कई एनसीआर ज़िलों के ज़िला अधिकारियों और तेल कंपनियों (जिनमें भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड शामिल हैं) के क्षेत्रीय अधिकारियों को दें। ध्यान दें, कोर्ट ने निर्देश लेने के लिए 3 दिन का समय दिया और मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर तक के लिए टाल दी थी। हालांकि, यह केस जस्टिस प्रकाश पाडिया वाली बेंच के सामने लिस्ट हुआ, जिन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस द्वारा नामित बेंच में होगी।