उम्रकैद की सजा के दोषी सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीआईओएस से मांगा जवाब
उम्रकैद की सजा के दोषी सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीआईओएस से मांगा जवाब
प्रयागराज, 26 अगस्त। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया जिले के सिकंदरपुर स्थित श्री व्यंतानंद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक आजीवन कारावास की सजा के दोषी सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान की अनुमति देने वाले जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक व शिक्षा निदेशक से याचिका पर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने विद्यालय की प्रबंध समिति की याचिका पर यह आदेश पारित किया।
विद्यालय की प्रबंध समिति ने 14 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने वेतन खाते के एकल संचालन की अनुमति देते हुए कार्यवाहक प्रधानाचार्य राम प्रसाद गुप्ता के साथ-साथ प्रतिवादी संख्या 7, सहायक अध्यापक सुधाकर शुक्ला को भी वेतन भुगतान की छूट दी थी। सुधाकर शुक्ला को हत्या (धारा 302/34 भादंसं) और आर्म्स एक्ट के एक मामले में सत्र न्यायालय ने 15 जुलाई 2015 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 13 वर्ष की वास्तविक सजा और छूट सहित 14 वर्ष पूरे होने पर उन्हें 29 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। उनकी आपराधिक अपील अभी हाईकोर्ट में लंबित है।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जमानत मिलने से दोषसिद्धि रद्द या स्थगित नहीं होती, इसलिए उक्त आदेश विधि-विरुद्ध है। वहीं प्रतिवादी के अधिवक्ता ने कहा कि उनके खिलाफ आज तक कोई अनुशासनिक कार्यवाही, आरोप-पत्र या कारण बताओ नोटिस जारी नहीं हुआ, इसलिए निरीक्षक का आदेश वैध है। राज्य की ओर से स्थाई अधिवक्ता ने कहा कि जमानत का आदेश सजा के निष्पादन को स्थगित करता है, दोषसिद्धि को नहीं, जिसके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 389 (अब बीएनएसएस की धारा 430) के तहत अलग आदेश आवश्यक है।
न्यायालय ने कहा कि वेतन भुगतान अधिनियम, 1971 की धारा 5 केवल वेतन वितरण के तरीके को नियंत्रित करती है, यह वेतन के मूल हकदारी का स्वतंत्र निर्धारण नहीं करती। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि यह मामला सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में प्रबंध समिति और शिक्षा प्राधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर बनी अस्पष्टता को दर्शाता है, तथा अनुदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक, बलिया को विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश, दिया ,जिसमें प्रधानाचार्य/शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा अभिलेख, प्रबंध समिति के गठन, दोषसिद्धि के बाद वेतन भुगतान के आधार सहित 12 बिंदुओं की जांच शामिल। प्रबंधक को 72 घंटे में सभी शिक्षण व गैर-शिक्षण स्टाफ के सेवा अभिलेख निरीक्षक को सौंपने का आदेश दिया। कहा विवादित आदेश पारित करने वाले अधिकारी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड सहित उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देंगे।
निदेशक शिक्षा (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश को सेवा अभिलेख रखरखाव, नियुक्ति प्रक्रिया, आपराधिक दोषसिद्धि की स्थिति में अनुशासनिक कार्यवाही और वेतन खाते के एकल संचालन संबंधी प्रावधानों पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता जी.के. सिंह को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया गया, जिनकी सहायता के लिए अधिवक्ता सत्येंद्र सिंह भी नियुक्त।पुलिस अधीक्षक, बलिया और सोसाइटी रजिस्ट्रार कार्यालय को जांच में हर आवश्यक सहायता देने का आदेश।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल तथ्यों की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए हैं और यह किसी की नियुक्ति, सेवा में बने रहने या दोषिता पर अंतिम निर्णय नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026को होगी।