पूतना वध से गोवर्धन पूजा तक, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने मोहा मन; भावविभोर हुए श्रद्धालु
मीरजापुर के हरिहरपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन वृंदावन की महिमा और श्रीकृष्ण की लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन।
मीरजापुर, 06 अक्टूबर। जमालपुर क्षेत्र के हरिहरपुर गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास पं. भरत कृष्ण शास्त्री महाराज ने पूतना वध, गोवर्धन पूजा और वृंदावन की महिमा का प्रसंग सुनाया।
कथा व्यास ने कहा कि कंस के भेजने पर पूतना बालकृष्ण को मारने के लिए मातृत्व का रूप धारण कर गोकुल पहुंची थी। भगवान श्रीकृष्ण ने उसके छल को पहचान लिया और उसका वध कर उसे सद्गति प्रदान की। उन्होंने कहा कि भगवान के पास व्यक्ति जिस भाव से आता है, उसी भाव को स्वीकार करते हैं। पूतना विष पिलाने आई थी, लेकिन मां का रूप धारण करने के कारण भगवान ने उसके भाव को देखते हुए उसका उद्धार किया।
गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रकृति के सम्मान और अहंकार के पराभव का प्रतीक है। इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया। प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं ने गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाए।
वृंदावन की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा प्रेम और भक्ति का धाम है। कथा के दौरान कल्लू सिंह, जीतबहादुर राय, अखिलेश सिंह, गोविंद पटेल, दीना सिंह, रमाकांत, धीरज बाबा सिंह, अजय पटेल, कौशलेश सिंह, रामसजीवन सिंह समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।