अखिलेश यादव की हिरासत पर सपा का विरोध, दान बहादुर मधुर बोले- ‘लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन’
प्रयागराज में सपा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर जताई नाराजगी, 8 अक्टूबर को जिला कार्यालय से बालसन तक पैदल मार्च का ऐलान।
प्रयागराज, 06 अक्टूबर।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चुनाव आयोग के समक्ष प्रदर्शन के लिए जाते समय दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की पार्टी ने कड़ी निंदा की है। यह बात मंगलवार को प्रयागराज के जार्जटाउन स्थित पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में सपा प्रवक्ता दान बहादुर सिंह मधुर ने कही।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रहे विपक्ष के नेता को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए समाजवादी पार्टी लगातार संघर्ष करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाता है तो सरकार और संवैधानिक संस्थाओं को उसका जवाब देना चाहिए। पुलिस के माध्यम से विपक्ष की आवाज दबाना उचित नहीं है।
जिलाध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना प्रत्येक राजनीतिक दल और नागरिक का अधिकार है। सरकार को विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन ने कहा कि अखिलेश यादव लगातार मतदाता अधिकारों, पारदर्शी चुनाव व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के मुद्दे उठा रहे हैं। ऐसे में उन्हें हिरासत में लिया जाना सत्ता की निरंकुश मानसिकता को दर्शाता है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
इस मौके पर विधायक विजमा यादव, संदीप पटेल और गीता शास्त्री ने संयुक्त रूप से कहा कि यह कार्रवाई केवल अखिलेश यादव या इंडिया गठबंधन के नेताओं के खिलाफ नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव चाहने वाले करोड़ों मतदाताओं के अधिकारों पर भी प्रहार है।
दान बहादुर सिंह मधुर ने बताया कि आठ अक्टूबर को दोपहर 12 बजे जार्ज टाउन स्थित सपा जिला कार्यालय से नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का पैदल मार्च निकलेगा। यह मार्च बालसन स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंचेगा। वहां संविधान के अनुच्छेद 326 का पाठ किया जाएगा और इसके बाद राष्ट्रगान होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।