हत्या षड्यंत्र की आरोपित पूजा सकुन पांडेय को हाईकाेर्ट से मिली जमानत

हत्या षड्यंत्र की आरोपित पूजा सकुन पांडेय को हाईकाेर्ट से मिली जमानत

हत्या षड्यंत्र की आरोपित पूजा सकुन पांडेय को हाईकाेर्ट से मिली जमानत

प्रयागराज, 14 जुलाई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अलीगढ़ के रोरावर थाना क्षेत्र में हुई एक हत्या के मामले में आरोपित पूजा शकुन पांडेय उर्फ अन्नपूर्णा भारती को मंगलवार को सशर्त जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने यह आदेश दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 सितंबर 2025 को दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवार युवकों ने शिकायतकर्ता के पिता की बस में यात्रा के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस साजिश में याची और उसके पति पर भी शक जताया गया था। बाद में सीसीटीवी फुटेज में हत्यारों की पहचान सह-अभियुक्त फैजल और आसिफ के रूप में हुई। फैजल को 1 फरवरी 2026 और आसिफ को 3 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया, दोनों की निशानदेही पर तमंचे भी बरामद हुए। मामला बीएनएस की धारा 103(1), 61(2) और 351(3) के तहत दर्ज है।

याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल को केवल इस आधार पर फंसाया गया है कि 27 सितंबर 2025 को उसके मोबाइल से सह-अभियुक्त फैजल के मोबाइल पर 11 बार कॉल हुई थी, जबकि साजिश में संलिप्तता का कोई ठोस सबूत नहीं है। यह भी कहा गया कि पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है, और महिला होने के नाते बीएनएसएस की धारा 480 के तहत भी वह जमानत की हकदार है। याची 11 अक्टूबर 2025 से जेल में बंद थी।

राज्य सरकार की ओर से जमानत का पुरजोर विरोध किया गया। उनका कहना था कि आवेदिका के पति अशोक कुमार पांडेय ने भी फैजल और आसिफ को 27 बार कॉल की थी, और याची के भाई ने बयान दिया था कि पति से अलग होने के बाद याची ने बदला लेने के लिए सुपारी किलर की व्यवस्था की थी।

न्यायालय ने पाया कि गोली चलाने की भूमिका सीधे तौर पर सह-अभियुक्त फैजल और आसिफ की है, जिनकी पहचान सीसीटीवी फुटेज में हुई और जिनकी निशानदेही पर हथियार भी बरामद हुए, जबकि याची पर केवल साजिश का आरोप है और इसका कोई निर्णायक सबूत नहीं है। मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना, अपराध की प्रकृति, साक्ष्य और याची के महिला होने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

न्यायालय ने याची को व्यक्तिगत मुचलके और समान राशि के दो प्रतिभूति पर रिहा करने का आदेश दिया, साथ ही ये शर्तें लगाईं:

- गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगी,- बिना किसी स्थगन की मांग किए ट्रायल में सहयोग करेगी,- रिहाई के बाद कोई अपराध नहीं करेगी,- जमानत मुचलके की शर्तों का पालन करेगी।किसी भी शर्त के उल्लंघन को जमानत रद्द करने का आधार माना जाएगा।