सरकारी सर्जन डॉ. राहुल वर्मा को बड़ी राहत, बिना कानूनी प्रक्रिया के FIR का आदेश रद्द; पूरी आपराधिक कार्यवाही भी खत्म

हाईकोर्ट ने कहा- लोकसेवक के खिलाफ जांच का आदेश देने से पहले वरिष्ठ अधिकारी की रिपोर्ट और संबंधित अधिकारी का पक्ष सुनना जरूरी है। गौतमबुद्ध नगर ACJM के 12 अगस्त के आदेश को कोर्ट ने निरस्त कर दिया।

सरकारी सर्जन डॉ. राहुल वर्मा को बड़ी राहत, बिना कानूनी प्रक्रिया के FIR का आदेश रद्द; पूरी आपराधिक कार्यवाही भी खत्म

प्रयागराज, 12 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों और लोकसेवकों को सुरक्षा देने वाली भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की नई कानूनी प्रक्रिया के तहत अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की एसीजेएम कोर्ट द्वारा सरकारी सर्जन डॉ राहुल वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश और संबंधित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने डॉ राहुल वर्मा की याचिका पर दिया है। गौतमबुद्ध नगर के धीरेंद्र ने यथार्थ अस्पताल पर अपनी पत्नी की सर्जरी (लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी) के दौरान मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार सर्जरी के बाद पेट में 10 मिमी की पथरी छूट गई थी, जिसे बाद में दूसरे अस्पताल में निकलवाना पड़ा। इसकी जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने तीन सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें सरकारी अस्पताल के कंसल्टेंट सर्जन डॉ राहुल वर्मा भी सदस्य थे। शिकायतकर्ता समिति की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने अदालत में अर्जी दाखिल की।

गौतमबुद्ध नगर के एसीजेएम प्रथम ने मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि नए कानून बीएनएसएस की धारा 175(4) लोकसेवकों को आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। इसके तहत किसी लोकसेवक के खिलाफ जांच का आदेश देने से पहले संबंधित वरिष्ठ अधिकारी से रिपोर्ट लेना और आरोपी लोकसेवक का पक्ष सुनना अनिवार्य है। एसीजेएम अदालत ने डॉ वर्मा से कोई जवाब मांगे बिना ही सीधे एफआईआर का आदेश दिया, जो कानूनन मान्य नहीं है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याची सिर्फ सीएमओ द्वारा गठित जांच समिति का सदस्य था और उसने अपने सरकारी कर्तव्यों का पालन किया था। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि वह मरीज के इलाज या सर्जरी में सीधे तौर पर शामिल था। कोर्ट ने ओम प्रकाश अंबेडकर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए माना कि प्रक्रियागत नियमों की अनदेखी कर लोकसेवक पर मुकदमा चलाना अनुचित है।

उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए डॉ राहुल वर्मा के संबंध में एसीजेएम कोर्ट के गत 12 अगस्त के आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।