योगी मंत्रिमंडल विस्तार : जातीय और सामाजिक समीकरणों में फिट हैं नये मंत्री, सरकार की हैट्रिक बनाने पर नजर
योगी मंत्रिमंडल विस्तार : जातीय और सामाजिक समीकरणों में फिट हैं नये मंत्री, सरकार की हैट्रिक बनाने पर नजर
लखनऊ, 10 मई । उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किये गये नये चेहरे न केवल प्रदेश की राजनीतिक समीकरणों की नापतौल में बल्कि भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों में भी फिट बैठते हैं। मकसद सीधा है कि अगले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव तक में पूरब से लेकर पश्चिम तक भगवा लहर बनी रहे। साथ ही विपक्षी दलों के हर दांव को ध्वस्त करते हुए प्रदेश में भाजपा सरकार की हैट्रिक बनाने की भी कवायद है।
योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में दूसरे विस्तार से पहले तक मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री समेत 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 18 राज्य मंत्री समेत कुल 54 मंत्री थे। अधिकतम 60 मंत्री बनाये जा सकते हैं। रविवार को जनभवन में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में आठ को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इनमें दो मंत्री पहले से ही राज्यमंत्री के रूप में शामिल हैं और उन्हें प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया। इसी प्रकार देखा जाय तो आठ में छह नये चेहरे हैं। उनमें दो कैबिनेट मंत्री और चार राज्यमंत्री शामिल किये हैं। इस प्रकार मंत्रिमंडल में अब अधिकतम 60 मंत्री हो गये हैं।
जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश
रविवार को योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की वजह उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव माने जा रहे हैं। इन चुनावों में अब आठ महीने शेष हैं। यही कारण है कि लंबे समय से टलते आ रहे मंत्रिमंडल विस्तार को आज मूर्तरूप देकर जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गयी है। इसमें जहां छह नये मंत्री बनाए गये हैं तो वहीं दो मंत्रियों को राज्यमंत्री से प्रमोशन देकर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह भी है कि राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय को भी कैबिनेट मंत्री के रूप में पुरस्कृत किया गया है।
नये मंत्री और सामाजिक समीकरण
रविवार को कैबिनेट मंत्री बने पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी जाट समाज से आते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरणों के हिसाब से भूपेंद्र चोधरी को शामिल किया गया है। वह भाजपा उप्र के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। योगी सरकार के प्रथम कार्यकाल में मंत्री रहे हैं। दूसरे कैबिनेट मंत्री रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज कुमार पाण्डेय हैं। ब्राहमण समाज के बडे नेता माने जाते हैं और विषम परिस्थतियों में भी अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाये रखने में सफल रहते हैं। इसी प्रकार अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतहेपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, जाटव समाज से आने वाले अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेन्द्र दिलेर और लाेधी समाज से आने वाले कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश राजपूत ने पहली बार राज्यमंत्री पद की शपथ ली है। इनमें कन्नौज, फतेहपुर और फर्रुखाबाद क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। ऐसे में भाजपा को पीडीए की काट के लिए दो मजबूत चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल करने थे। इनमें कृष्णा पासवान और कैलाश राजपूत सामाजिक समीकरणों में फिट हैं। जबकि जाटव समाज के सुरेन्द्र दिलेर का परिवार अलीगढ़ जिले और आसपास दशकों से राजनीति कर रहा है और जाटव समाज में प्रतिष्ठित परिवार माना जाता है। इनके बाबा व पिता भी सांसद—विधायक रह चुके हैं।
इसी प्रकार मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर वर्तमान में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत हैं। अब इनको राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल भी राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग काे प्रोन्नत कर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। इन दोनों मंत्रियों का अपने अपने क्षेत्र और समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है।