लक्षणों के आधार पर अपने मन से दवा का सेवन नुकसानदेह : डॉ. सुजाता देव

लक्षणों के आधार पर अपने मन से दवा का सेवन नुकसानदेह : डॉ. सुजाता देव

लक्षणों के आधार पर अपने मन से दवा का सेवन नुकसानदेह : डॉ. सुजाता देव

लखनऊ, 12 मार्च । अवध गर्ल्स डिग्री कालेज के सभागार में बृहस्पतिवार को ‘आधी आबादी को दें बेहतर सेहत का उपहार’ विषय पर स्वास्थ्य परिचर्चा आयोजित की गयी। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पी. एस. आई. इंडिया) के सहयोग से आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या डॉ. बीना राय ने किया। सभागार में सैकड़ों की तादाद में मौजूद छात्राओं और शिक्षिकाओं को चिकित्सकों ने स्वस्थ रहने के जरूरी टिप्स दिए, ताकि उनके हौसलों को उड़ान मिल सके और वह सुनहरे भविष्य निर्माण के लिए संजोए सपनों को साकार कर सकें।

इस मौके पर केजीएमयू के क्वीन मेरी की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव ने कहा कि इंटरनेट या सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर देखकर मिलते-जुलते लक्षणों के आधार पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर सेवन करना घातक हो सकता है। इसलिए प्रशिक्षित और अनुभवी चिकित्सकों की सलाह पर ही दवाओं का सेवन करें।

पी.एस.आई. इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा ने कहा कि नारी उत्थान के लिए किये गए तमाम प्रयासों का ही नतीजा है कि आज आधी आबादी राष्ट्र को एक नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सभागार में इतनी बड़ी तादाद में मौजूद बच्चे अपने सुनहरे भविष्य और ऊँची उड़ान के लिए न जाने कितने सपने बुने होंगे, जिन्हें बेहतर स्वास्थ्य के बल पर ही साकार किया जा सकता है।

वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति बाजपेयी ने कहा कि पूरी आबादी की जननी महिला ही है। वह पूरे परिवार की ताकत होती है, इसलिए उनके स्वास्थ्य का खास ख्याल रखना परिवार की भी बड़ी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के बारे में छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए इस समय 14 साल तक की बच्चियों को मुफ्त में लगाई जा रही एच.पी. वी. वैक्सीन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों कैंसर की वजह से हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं दम तोड़ देती हैं जबकि समय से वैक्सीन, स्क्रीनिंग व जाँच से बचाव संभव है।

वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शिखा श्रीवास्तव ने स्वस्थ निर्णय लेने के लिए स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के प्रति जागरूकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं जीवन में कई तरह के शारीरिक बदलावों के दौर से गुजरती हैं, जैसे- मासिक धर्म, गर्भावस्था, मेनोपॉज आदि। इसके लक्षणों और बचाव के बारे में पहले ही उन्हें जागरूक करना बेहतर होगा। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग व व्यायाम को अपनाने पर भी जोर दिया।

एसजी पीजीआई की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने बहुत ही रोचक अंदाज में प्यासे कौवे और मगरमच्छ-खरगोश की कहानियों के आधार पर छात्राओं को जीवन में आगे बढ़ने के गुरु मन्त्र दिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कामयाब होने के लिए आत्मजागरूकता, सहानुभूति, रचनात्मक सोच, प्रभावी संवाद, तनाव रहित रहना बहुत जरूरी है।