भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बना 'महाकुम्भ': नन्दी
महाकुंभ को विश्व के सबसे बड़े मानव समागम के रूप में युगों युगों तक किया जाएगा स्मरण

महाकुम्भ नगर, 27 फरवरी । भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक 'महाकुम्भ 2025, प्रयागराज' में अब तक 67 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम के पवित्र जल में आस्था के साथ स्नान किया है। यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल भारत की धार्मिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और एकता का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। यह बात गुरूवार को मीडिया से उप्र के कैविनेट मंत्री नन्द गोपाल नंदी ने कही।
उन्होंने कहा कि महाकुंभ ने देश और दुनिया को सनातन धर्म, संस्कृति,सभ्यता से भी परिचित कराया है और सनातन धर्म की वैभवशाली इतिहास शक्ति को भी दिखाया है। विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं उत्तर प्रदेश के कर्मयोगी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व द्वारा ही संभव हो पाया है।
दिव्य,भव्य महाकुंभ 2025 दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बन गया है जो देश और दुनिया को सदियों तक याद रहेगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महाकुम्भ 2025 का भव्य, दिव्य एवं सकुशल विराम महाशिवरात्रि पर हुआ।
महाकुम्भ 2025 ने भारतीय सनातन संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना को एक नई ओजस्विता के साथ सम्पूर्ण विश्व में प्रकीर्णित किया है। लाखों वर्षों से सतत, अनवरत भारतीय ऋषि परम्परा एवं धार्मिक मूल्य एक नई आभा, गरिमा एवं महिमा के साथ प्रतिष्ठित हुए हैं।
महाकुम्भ 2025 विश्व के सबसे बड़े मानव समागम के रूप में युगों युगों तक स्मरण किया जाएगा। सांस्कृतिक गौरव के साथ ही सामाजिक समरसता का यह महापर्व प्रबंधन, सेवा कार्यों, व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं की दृष्टि से अलौकिक रहा है। देश एवं दुनिया के प्रत्येक कोने से आने वाले श्रद्धालुओं-स्नानार्थियों ने मां त्रिवेणी के पवित्र पावन संगम में आस्था की डुबकी लगाकर सनातन मानबिन्दुओं के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा का भावुकतापूर्ण प्रकटीकरण किया।