लाइब्रेरी केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मविकास का भी केंद्र है : रेखा दिवाकर
- अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी की शताब्दी वर्षगांठ समाराेह
लखनऊ, 06 मार्च । अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी लखनऊ में शुक्रवार को शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी की सचिव रेखा दिवाकर ने की। गौरतलब है कि 6 मार्च 1926 को अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी की वर्तमान भवन में स्थापना हुई थी। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलन से हुई। अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन सुप्रिया शर्मा ने पुष्पगुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर आयाेजित समाराेह में पुस्तकालय सचिव रेखा दिवाकर ने कहा कि किसी संस्था का शताब्दी समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक उपलब्धि होता है। सौ साल की यात्रा में तमाम उतार—चढ़ाव के बाद आज ये यात्रा जिस भव्य रूप में हम सबके सामने है, वो हम सबके लिए गर्व व हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि, लाइब्रेरी जीवन का बड़ा अहम अंग है। ये केवल ज्ञान का केंद्र नहीं है, बल्कि इससे सामाजिकता, समरसता और सदभावना को भी बढ़ावा मिलता है। छात्र ज्ञानार्जन के साथ साथ सुनहरे भविष्य के सपने भी लाइब्रेरी में गढ़ते और बुनते हैं। उन्होंने अपने छात्रकाल के समय लाइब्रेरी में बिताए समय को भी याद किया। कहा कि, केवल छात्रों को ही नहीं सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए लाइब्रेरी जरूरी है। उन्होंने आहवान किया कि सभी आयु वर्ग के लोगों को लाइब्रेरी की सदस्यता लेनी चाहिए और नियमित तौर पर लाइब्रेरी में आना भी चाहिए। मुख्य अतिथि ने कहा कि, पाठकगण यदि अन्य सुविधाएं चाहते हैं तो वो लाइब्रेरी प्रबंधन के संज्ञान में लायें। उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर पुस्तकालय सचिव ने लाइब्रेरी में वरिष्ठ नागरिकों हेतु वरिष्ठ नागरिक अनुभाग एवं कैफेटेरिया का उद्घाटन किया।साथ ही तीन दिनों तक चलने वाली दुर्लभ पुस्तकों एवं चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया। अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन सुप्रिया शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि, यहां अनेक भाषाओं में (हिंदी,अंग्रेजी,उर्दू ,संस्कृत, फ़ारसी, अरेबिक) अत्यंत उत्कृष्ट कोटि की ऐतिहासिक महत्व की दुर्लभ पुस्तकों के साथ ही बहुमूल्य पांडुलिपियां भी उपलब्ध है। ये राज्य की एकमात्र पब्लिक लाइब्रेरी है जो पूरी तरह से डिजिटाइज्ड और आटोमेटेड है। इस अवसर पर सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ.गौरव कुमार जायसवाल ने कहा कि, लखनऊ में इस पुस्तकालय के अलावा अन्य कोई भी पब्लिक लाइब्रेरी डिजिटाइज्ड एवं औटोमेटेड नहीं है ।
इस अवसर पर पुस्तकालय सचिव ने लाइब्रेरी के पूर्व कर्मचारियों को सम्मानित किया, जिनमें नुसरत नाहिद, शशिकला एवं हरीशचंद्र एवं अन्य समकक्ष पब्लिक लाइब्रेरी के पुस्तकालय जैसे गंगाराम सार्वजनिक पुस्तकालय, नरेन्द्रदेव पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्षों को भी मोमेंटों एवं पुष्प देकर सम्मानित किया गया। सचिव ने लाइब्रेरी में अध्ययन करने वाले उन सदस्यों का भी सम्मानित किया, जो सरकारी सेवा में चयनित हो चुके हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुप्रिया शर्मा, डॉ. गौरव कुमार जायसवाल, रमेश चंद्र, रामकरन एवं एमटीएस स्टाफ, लाइ्ब्रेरी के सदस्य, छात्र एवं आगंतुक शामिल हुए।