एफआईआर के बाद घर गिराने की आशंका को लेकर दाखिल याचिका निस्तारित

--कोर्ट ने कहा, उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे मामले में पारित आदेश का अनुपालन अधिकारी अनुपालन करेंगे

एफआईआर के बाद घर गिराने की आशंका को लेकर दाखिल याचिका निस्तारित

प्रयागराज, 16 फरवरी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एफआईआर दर्ज होने पर अभियुक्त का घर गिराने की आशंका को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य से उम्मीद की है कि सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में पारित आदेश का अनुपालन करते हुए पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनायेगा।

कोर्ट ने साफ कहा कि यदि ध्वस्तीकरण की मनमानी कार्रवाई की गई तो इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना मानकर अवमानना कार्यवाही की जायेगी। यदि अधिकारी दोषी पाए गये तो उन्हें इसका दुष्परिणाम भुगतना होगा।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि याची ऐसी कोई सरकारी नोटिस नहीं दे सकी जिससे उसकी आशंका को बल मिलता हो। इसलिए ध्वस्तीकरण किए जाने का भय काल्पनिक व तार्किक लगता है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।

यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने गौसिया की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि वह आफताब आलम की बीबी है, उसके बेटे के खिलाफ 23 जनवरी 26 को एफआईआर दर्ज की गई है। उसे कोई नोटिस नहीं दी गई है। किन्तु अधिकारी घर आकर नाप जोख कर रहे हैं। मकान के ध्वस्तीकरण का खतरा है। अधिकारियों को मकान ध्वस्त करने से रोकने की मांग की।

याचिका में राज्य सरकार के अलावा जिलाधिकारी व पुलिस कमिश्नर प्रयागराज तथा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक चित्रकूट को भी पक्षकार बनाया गया है।