अभिभावकों ने लिया संकल्प: बच्चों के साथ ही पौधों की भी करेंगे देखभाल – एक अभिनव पहल से हरियाली की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

अभिभावकों ने लिया संकल्प: बच्चों के साथ ही पौधों की भी करेंगे देखभाल – एक अभिनव पहल से हरियाली की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

अभिभावकों ने लिया संकल्प: बच्चों के साथ ही पौधों की भी करेंगे देखभाल – एक अभिनव पहल से हरियाली की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

लखनऊ, 15 जुलाई । पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार ने एक अनूठी और सराहनीय पहल की है। प्रदेश में 1 से 7 जुलाई के मध्य जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु के अभिभावकों को 'ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट' के साथ एक पौधा भी प्रदान किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों के सुनहरे भविष्य के साथ-साथ एक हरित और स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण की नींव रखना है। योगी सरकार की इस दूरदर्शी पहल को प्रदेश भर के अभिभावकों का भरपूर और उत्साहपूर्ण समर्थन मिल रहा है। अभिभावकों ने न केवल सरकार के इस प्रयास की सराहना की है, बल्कि उन्होंने यह दृढ़ संकल्प भी लिया है कि वे नवजात शिशु के पालन-पोषण के साथ-साथ उन्हें भेंट किए गए पौधों की भी उतनी ही लगन और जिम्मेदारी से देखभाल और संरक्षण करेंगे।

इस अभियान के तहत अभिभावकों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे जैसे लकड़ी देने वाले वृक्ष, फलदार पौधे और औषधीय गुणों से भरपूर सहजन आदि प्रदान किए गए, ताकि वे अपने बच्चों के बड़े होने के साथ-साथ इन पौधों को फलता-फूलता देख सकें। इस अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सर्वाधिक ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट और पौधे लखनऊ मंडल में वितरित किए गए, जिसने पहले स्थान पर रहकर अभियान में अग्रणी भूमिका निभाई। इसके बाद देवीपाटन मंडल दूसरे और आगरा मंडल तीसरे स्थान पर रहा। इन सात दिनों की अवधि में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले कुल 18,348 नवजातों को यह विशेष 'ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट' प्रदान किया गया, जो प्रदेश के पर्यावरण प्रेम और जन-जागरूकता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।

वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से अभियान को मिला मूर्त रूप यह महत्वपूर्ण अभियान वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अद्वितीय समन्वय का परिणाम है। दोनों विभागों ने मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की, ताकि इस पहल को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा सके और इसका अधिकतम लाभ जनमानस तक पहुंच सके। पौधरोपण महाभियान के मिशन निदेशक, दीपक कुमार ने बताया कि सभी प्रभागीय वनाधिकारियों (DFOs) को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के साथ सीधा समन्वय स्थापित करें। इस समन्वय के तहत, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) सहित अन्य सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में होने वाले संस्थागत प्रसवों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रत्येक संस्थागत प्रसव से जन्मे बच्चे के अभिभावकों को यह सर्टिफिकेट और पौधा व्यक्तिगत रूप से प्रदान किया गया। इसके साथ ही, अभिभावकों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे इन पौधों को अपने घरों के आसपास उपलब्ध खाली स्थानों पर रोपित करें, जिससे स्थानीय स्तर पर हरियाली बढ़े और पर्यावरण को लाभ मिले। यह पहल दर्शाती है कि सरकारी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय कैसे बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

अभिभावकों को भेंट स्वरूप प्रदान किए गए विविध प्रजातियों के पौधे वन विभाग ने इस पहल के तहत अभिभावकों को अत्यंत विविध प्रकार के पौधे भेंट किए, जिनमें न केवल छाया और फल देने वाले वृक्ष शामिल थे, बल्कि औषधीय महत्व के पौधे भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे। इन पौधों की प्रजातियों में जामुन, सहजन, अमरूद (जो अपने पौष्टिक फलों के लिए जाना जाता है), नीम (जो अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है), सागौन, शीशम, सिल्वर ओक, आंवला, कंजी, आम (फलों का राजा), अनार, बेलपत्थर, बकैन, तुलसी (जो भारतीय संस्कृति में पवित्र और औषधीय मानी जाती है), बरगद (दीर्घायु और विशाल), पीपल (जो सर्वाधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है), बेल, महुआ, कटहल, पाकड़, महागोनी, लीची और नींबू जैसे अनेक उपयोगी और पर्यावरण के लिए लाभकारी प्रजातियां शामिल थीं। इस विविधता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पौधे स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हों और भविष्य में पर्यावरण और मानव जीवन दोनों के लिए बहुआयामी लाभ प्रदान कर सकें।

क्या है 'ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट'? 'ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट' योगी सरकार की 'एक बच्चा, एक पेड़' अवधारणा पर आधारित एक अनूठा और प्रतीकात्मक प्रमाणपत्र है। यह प्रमाणपत्र 1 से 7 जुलाई की अवधि में सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु के अभिभावकों को संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) द्वारा व्यक्तिगत रूप से जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और अन्य निर्दिष्ट सरकारी अस्पतालों में जाकर प्रदान किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के जीवन की शुरुआत के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक गहरी चेतना विकसित करना है। यह अभिभावकों को न केवल नवजात की समुचित देखभाल के लिए प्रोत्साहित करता है, बल्कि उन्हें उस पौधे की भी पूरी लगन से देखभाल और संरक्षण के लिए प्रेरित करता है जो बच्चे के जन्म के प्रतीक के रूप में दिया गया है। यह सर्टिफिकेट भविष्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि बच्चों का विकास एक स्वच्छ, स्वस्थ और हरे-भरे वातावरण में हो, और वे बड़े होकर अपने आसपास के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नागरिक बनें।