प्रयागराज हत्याकांड का खौफनाक सच: डेढ़ करोड़ के गहनों के लालच में सगे बेटे ने उजाड़ा परिवार, फिर दोस्त ने ही उतारा उसे मौत के घाट!
बियर-कचौड़ी के साथ लिखी गई थी सामूहिक हत्याकांड की स्क्रिप्ट, महज 12 घंटे में आरोपी सनी गुप्ता गिरफ्तार, 1 किलो सोना बरामद
प्रयागराज । संगम नगरी प्रयागराज के साउथ मलाका (थाना कोतवाली) इलाके में हुए सनसनीखेज चौहरे हत्याकांड (Four Murders) का पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर सफल अनावरण कर दिया है. इस खौफनाक वारदात के पीछे जो सच सामने आया है, उसने न सिर्फ पुलिस को बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. इस पूरे हत्याकांड की स्क्रिप्ट लालच, विश्वासघात और अपनों के ही खून से लिखी गई थी.
मामले का खुलासा करते हुए प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार (Joginder Kumar) ने बताया कि इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड कोई बाहरी नहीं, बल्कि घर का बड़ा बेटा अभिषेक ही था. अभिषेक ने अपने दोस्त सनी गुप्ता के साथ मिलकर अपने ही माता-पिता और बहन की बेरहमी से हत्या की, और बाद में माल के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में दोस्त सनी गुप्ता ने अभिषेक को भी मौत के घाट उतार दिया. पुलिस ने आरोपी सनी गुप्ता को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से शत-प्रतिशत लूटे गए जेवरात बरामद कर लिए हैं.
संपत्ति से बेदखली और कर्ज बना सामूहिक कत्लेआम की वजह
पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार के मुताबिक, मृतक वीरेंद्र वैश्य ने अपने बड़े बेटे अभिषेक को उसकी गलत आदतों और अय्याशी के कारण अपनी संपत्ति से बेदखली का नोटिस दे दिया था. अभिषेक भारी कर्ज में डूबा हुआ था और क्रिमिनल माइंडेड था. घर में पैसे न मिलने और रोज-रोज के झगड़ों से तंग आकर अभिषेक ने अपने घर में रखे करोड़ों के जेवरात को लूटने की साजिश रची. इस खौफनाक साजिश में उसने अपने साथ उसी कॉम्प्लेक्स में कचौड़ी और आलू-पापड़ का ठेला लगाने वाले अपने दोस्त सनी गुप्ता को शामिल किया.
बियर, कचौड़ी और फिर खूनी खेल का वो 'ब्लैक संडे'
घटना वाले दिन यानी 31 तारीख (रविवार) को दोपहर करीब 3:00 बजे अभिषेक ने सनी गुप्ता को फोन करके लोहे की रॉड, बियर और कचौड़ी लेकर अपनी दुकान पर बुलाया. दोनों दुकान के अंदर बैठ गए और बाहर का शटर गिराकर ताला लगा दिया. शाम 5:00 बजे तक दोनों ने बियर पी और कचौड़ी खाई.
शाम ठीक 5:00 बजे जैसे ही अभिषेक की बहन मीनाक्षी हमेशा की तरह सीढ़ियों से नीचे दुकान खोलने के लिए उतरी, अभिषेक और सनी ने उस पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया. मीनाक्षी की हत्या करने के बाद दोनों उसकी लाश को घसीटकर ऊपर ले गए और सीढ़ियों पर छोड़ दिया. इसके बाद दोनों सीधे उस कमरे में दाखिल हुए जहाँ वीरेंद्र वैश्य और उनकी पत्नी सो रहे थे. दोनों ने सोते हुए माता-पिता पर रॉड से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें भी मौत की नींद सुला दिया.
डेढ़ करोड़ के गहनों की लूट और 'बंटी-बबली' का फर्जी एंगल
माता-पिता और बहन को रास्ते से हटाने के बाद अभिषेक ने अलमारी की चाबी निकाली, क्योंकि उसे पता था कि सारा सोना कहाँ रखा है. अलमारी से लगभग 1 किलो 2 ग्राम सोना (पीली धातु) और 360 ग्राम चांदी बरामद की गई, जिसकी बाजार में कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है.
पुलिस को गुमराह करने के लिए क्रिमिनल माइंडेड अभिषेक ने एक और बड़ी चाल चली थी. उसने घर की दीवार और एक कार्डबोर्ड पर अपने दूसरे भाई अश्विनी वैश्य और उसकी पत्नी (जिन्हें लोग बंटी-बबली के नाम से जानते थे और जो साइबर फ्रॉड के मामले में कौशांबी जेल में बंद हैं) का नाम लिख दिया. अभिषेक को लगा कि ऐसा करने से पुलिस का शक उसकी बहू और दूसरे बेटे पर जाएगा. इसके बाद उन्होंने वारदात में इस्तेमाल हथौड़ा, मोबाइल और लैपटॉप को ऊपर रखी सिंटेक्स की पानी की टंकी में छुपा दिया.
'जो मां-बाप का नहीं हुआ... वो मेरा क्या होगा'— और हो गया चौथा मर्डर
गहने लूटने के बाद अभिषेक और सनी वापस नीचे अभिषेक की दुकान में आकर बैठ गए और माल का बंटवारा करने लगे. यहीं पर कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट आया. लालच में अंधे हो चुके अभिषेक ने सनी को धोखा देने की कोशिश की और कहा, "तुम सिर्फ 5 कंगन लो और यहाँ से भाग जाओ, बाकी माल बाद में दूंगा".
आरोपी सनी गुप्ता ने पुलिस और मीडिया के सामने अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा:
"अभिषेक ने सब करवाया था. लेकिन जब हिस्सा देने की बात आई, तो उसने मुझे मेरा हिस्सा देने से मना कर दिया और सिर्फ 5 कंगन देकर भगाने लगा. मुझे लगा कि जो लड़का अपने सगे मां-बाप और बहन को मार सकता है, वो आगे चलकर मुझे भी मार डालेगा. इसी डर से मैंने उसी रॉड से अभिषेक पर हमला कर दिया और उसे भी मार डाला."
अभिषेक की हत्या करने के बाद सनी गुप्ता ने सबूत मिटाने के लिए लाशों पर टॉयलेट क्लीनर और सर्फ डाल दिया. उसने खून से सने कपड़े बदले, खुद को साफ किया और मृतक पिता वीरेंद्र के ही कपड़े और जूते पहनकर सुबह 5:00 बजे दुकान का शटर खोलकर बाहर निकल गया.
कैसे सुलझी 4 मर्डर्स की यह उलझी गुत्थी?
शुरुआत में जब पुलिस को घर के अंदर तीन लाशें मिलीं, तो पुलिस का पहला शक अभिषेक पर ही था. लेकिन जब पुलिस ने बारीकी से पूरे घर की तलाशी ली और अभिषेक की बंद दुकान का ताला तोड़ा, तो वहां अभिषेक की भी लाश बरामद हुई.
इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने तत्काल 20 टीमें गठित कीं. सीसीटीवी (CCTV) सर्विलांस और मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) खंगालने पर पता चला कि सुबह 5:00 बजे कॉम्प्लेक्स से सनी गुप्ता बाहर निकल रहा था. पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर सनी गुप्ता को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में अपना सारा जुर्म कबूल कर लिया. उसके पास से लगभग 1 किलो सोना, चांदी और ₹1000 नकद शत-प्रतिशत बरामद कर लिए गए हैं.
लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: चौकी इंचार्ज और SSI सस्पेंड
इस पूरे मामले में पुलिस की गश्त (पेट्रोलिंग) कमजोर पाए जाने और तत्काल एक्शन न लेने के कारण पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने बड़ी कार्रवाई की है. लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसआई (SSI) कोतवाली मुलायम सिंह और संबंधित चौकी प्रभारी रोहित सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.
प्रयागराज की इस खौफनाक वारदात ने यह साबित कर दिया है कि जब इंसान की आंखों पर लालच का चश्मा चढ़ता है, तो वो रिश्तों की हर मर्यादा को भूलकर खुद की मौत का भी रास्ता तैयार कर लेता है.