नवाचार, उद्यमिता और युवाशक्ति ही विकसित भारत के निर्माण का आधार : राज्यपाल
नवाचार, उद्यमिता और युवाशक्ति ही विकसित भारत के निर्माण का आधार : राज्यपाल
लखनऊ, 03 जून । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बुधवार को चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री इंडिया द्वारा आयोजित “भारत स्टार्टअप शिखर सम्मेलन-2026” को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत अपनी विकास यात्रा के ऐसे ऐतिहासिक दौर में प्रवेश कर चुका है, जहाँ प्रत्येक भारतीय की आकांक्षा, प्रत्येक युवा का सपना और प्रत्येक नागरिक का परिश्रम मिलकर नए भारत की मजबूत नींव रख रहा है। यह नवाचार, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और युवाशक्ति का युग है, जो राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत केवल सपने देखने वाला राष्ट्र नहीं है, बल्कि उन सपनों को साकार करने की क्षमता रखने वाला आत्मविश्वासी भारत है। स्टार्टअप इंडिया अभियान से लेकर डिजिटल क्रांति तक देश ने यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और नवाचार के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। भारत के युवा अब रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बन रहे हैं और यही नए भारत की वास्तविक पहचान है।
राज्यपाल ने कहा कि आज विश्व भारत को आशा, नवाचार और संभावनाओं के केंद्र के रूप में देख रहा है तथा वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज पहले से अधिक प्रभावशाली और सशक्त हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में देश के 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक भागीदारी और संकल्प निहित है।
प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत में स्टार्टअप संस्कृति को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट तथा अटल इनोवेशन मिशन जैसी योजनाओं ने लाखों युवाओं को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से 2026 के बीच भारत में दो लाख तीस हजार से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप स्थापित हुए हैं तथा एक सौ बीस से अधिक यूनिकॉर्न का निर्माण हुआ है। इसके साथ ही भारत अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। इन स्टार्टअप्स के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में लगभग 73 हजार से अधिक स्टार्टअप्स में महिला निदेशक कार्यरत हैं, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
राज्यपाल ने कहा कि देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश आज निवेश, नवाचार और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश में 13 हजार से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिन्हें 76 से अधिक इनक्यूबेटर्स का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है तथा राज्य सरकार का लक्ष्य इनकी संख्या बढ़ाकर 100 तक पहुंचाना है। ये आंकड़े उत्तर प्रदेश के युवाओं में जागृत हुए आत्मविश्वास का भी प्रतीक हैं। यह वह आत्मविश्वास है जो युवाओं को अवसरों की प्रतीक्षा करने के बजाय अवसरों का सृजन करने के लिए प्रेरित कर रहा है। जब भारत पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब उत्तर प्रदेश इस लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण प्रेरक राज्य बनकर उभरा है।
उन्हाेंने कहा कि स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता पर भी ध्यान देना आवश्यक है। हमें ऐसा वातावरण विकसित करना होगा जहाँ नवाचार को प्रोत्साहन मिले, जोखिम लेने की संस्कृति को सम्मान मिले और असफलता को सीख के रूप में स्वीकार किया जाए। प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को अक्सर वित्तीय संसाधनों, मेंटरशिप, अनुमोदन प्रक्रियाओं और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त कर प्रणाली, श्रम कानूनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी जटिलताएं भी नवोद्यमियों के समक्ष बाधा बनती हैं। इन चुनौतियों को पहचानकर दूर करना समय की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। युवा उद्यमियों को प्रारंभिक चरण में 17,500 रुपये प्रतिमाह का भत्ता, 5 लाख रुपये तक का प्रोटोटाइप अनुदान तथा 7.50 लाख रुपये तक की सीड फंडिंग और विपणन सहायता प्रदान की जा रही है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम रिपोर्ट-2025 के अनुसार राज्य ने वर्ष 2014 से अब तक 8.6 बिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग आकर्षित किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 15 हजार से अधिक डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप सक्रिय हैं और इनमें से 7,800 से अधिक स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। यह नारी सशक्तीकरण और समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। राज्य सरकार द्वारा स्थापित 1,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स स्टार्टअप्स को वित्तीय मजबूती प्रदान कर रहा है। लखनऊ को भारत की प्रथम एआई सिटी के रूप में विकसित करने की योजना उत्तर प्रदेश की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है। यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश केवल वर्तमान में ही नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करने के लिए भी तैयार है। महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और दिव्यांग उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन प्रदान कर प्रदेश सरकार समावेशी विकास का उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत कर रही है।
उन्होंने बताया कि पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में इनक्यूबेटरों को तकनीकी अवसंरचना विकसित करने हेतु 1.25 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। साथ ही घरेलू पेटेंट के लिए 2 लाख रुपये तथा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था नवाचार को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
राज्यपाल ने कहा कि स्टार्टअप केवल आर्थिक इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि वे सपनों, संभावनाओं और सामाजिक परिवर्तन के वाहक हैं। इसलिए ऐसा वातावरण निर्मित किया जाना चाहिए जहाँ प्रत्येक युवा यह विश्वास कर सके कि उसका विचार भी दुनिया को बदल सकता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की समृद्ध परंपराओं और स्थानीय उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुरादाबाद का पीतल उद्योग, मेरठ के खेल उपकरण, भदोही के कालीन, गोरखपुर की टेराकोटा कला, लखनऊ की चिकनकारी तथा कानपुर का चमड़ा उद्योग प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना ने इन पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
राज्यपाल ने कहा कि ओडीओपी मार्ट तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से 20 हजार से अधिक उत्पाद डिजिटल बाजारों तक पहुंचे हैं, जिससे प्रदेश के कारीगरों और उद्यमियों को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब विदेश यात्राओं पर जाते हैं, तब वे भारतीय परंपरा और स्थानीय उत्पादों को उपहार के रूप में प्रस्तुत कर देश की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति का परिचय देते हैं।
विश्वविद्यालयों में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय आज नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि प्रदेश के 19 राज्य विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद तथा राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में वर्तमान समय में 1,533 स्टार्टअप सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इनमें से 1,180 स्टार्टअप केवल डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) एवं उससे संबद्ध संस्थानों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय अब केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि वे नवाचार, अनुसंधान और रोजगार सृजन के सशक्त केंद्र बन चुके हैं।
राज्यपाल ने बताया कि ए.के.टी.यू. से संबद्ध राजकीय एवं शासकीय संस्थानों में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से 15 इनक्यूबेशन सेंटर तथा एक अत्याधुनिक इनोवेशन हब की स्थापना की गई है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए 100 करोड़ रुपये की इनोवेशन निधि का गठन किया गया है। साथ ही स्टूडेंट-फैकल्टी इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप पॉलिसी लागू कर शिक्षण संस्थानों में उद्यमिता की संस्कृति विकसित की जा रही है।