ट्रांसजेंडर के शैक्षिक दस्तावेजों में नाम और लिंग बदलने से इंकार का आदेश रद्द

नाम परिवर्तित कर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश-ट्रांसजेंडर के अधिकार को लेकर अहम फैसला

ट्रांसजेंडर के शैक्षिक दस्तावेजों में नाम और लिंग बदलने से इंकार का आदेश रद्द

प्रयागराज, 06 नवंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने माध्यमिक शिक्षा परिषद, बरेली के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याची शरद रोशन सिंह के शैक्षिक दस्तावेजों में नाम और लिंग परिवर्तन की मांग ठुकरा दी गई थी।

याची ने लिंग परिवर्तन (महिला से पुरुष) सर्जरी के बाद जिला मजिस्ट्रेट से पहचान और जेंडर परिवर्तन प्रमाणपत्र प्राप्त किया था। इसके बाद अपने शैक्षिक प्रमाणपत्रों में नाम और लिंग परिवर्तन का अनुरोध किया। परिषद ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि नाम सुधारने में अत्यधिक देरी करने की कोई प्रक्रिया नहीं है और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 इस पर लागू नहीं होता। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याची अधिवक्ता अश्वनीग कुमार शर्मा व आकाश कुमार शर्मा ने दलील दी कि याची का उनके दस्तावेज में नाम न बदलना ट्रांसजेंडर अधिनियम का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि सम्बंधित अधिकारियों ने अधिनियम, 2019 की धारा 20 की अवहेलना की है, जो एक विशेष कानून है और अन्य सभी कानूनों पर वरीयता रखता है। साथ ही, अधिनियम के नियम 5(3) और उसके अनुसंलग्नक-1 के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति को शैक्षिक प्रमाण-पत्रों सहित सभी आधिकारिक दस्तावेजों में नाम, लिंग और फोटो बदलने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की निष्क्रियता से ट्रांसजेंडर के समानता, गरिमा और गैर भेदभाव के संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है।

कोर्ट ने 8 अप्रैल 2025 के विवादित आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार व बोर्ड को निर्देश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के शैक्षिक दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन कर नए प्रमाण-पत्र जारी करें।