आर्य समाज सिविल लाइंस प्रयागराज के गठन व वैधता की जांच का आदेश

--कोर्ट ने जिलाधिकारी को समिति गठित कर 30 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट, अगली सुनवाई 8 जुलाई को

आर्य समाज सिविल लाइंस प्रयागराज के गठन व वैधता की जांच का आदेश

प्रयागराज, 16 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सिविल लाइंस प्रयागराज में एक ही पंजीकरण व एक पते से कार्यरत आर्य समाज प्रयागराज व आर्य समाज संस्थान सेवा समिति प्रयागराज की स्थापना व वैधता की जांच का आदेश दिया है।

कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को निबंधक फर्म चिट व सोसायटी एवं पुलिस कमिश्नर द्वारा नामित सीनियर पुलिस अधिकारी की जांच समिति गठित करने तथा 30 दिन में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 08 जुलाई को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने साधना गुप्ता व सुहानी गुप्ता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि उसकी बेटी को मिर्जापुर के विपक्षी राजेश कुमार गुप्ता व अन्य की अवैध निरूद्धि से मुक्त कराकर स्वतंत्र किया जाय।

कोर्ट ने एस एच ओ विंध्याचल, मिर्जापुर को निर्देश दिया और सुहानी गुप्ता पेश हुई। उसने बताया कि बालिग है और अपनी मर्जी से राजेश कुमार गुप्ता के साथ आर्य समाज में शादी कर रह रही है। उसे किसी ने निरूद्ध नहीं किया है। जिस पर कोर्ट ने उसे स्वतंत्र कर दिया।

दूसरी तरफ कोर्ट ने आर्य समाज के सचिव को नोटिस जारी कर पूछा कि कितने प्रमाणपत्रों में चाका नैनी के राहुल व आकाश गवाह है और पिछले पांच महीनों में कितने प्रमाणपत्र जारी किए गए?

सचिव ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि दोनों गवाह विपक्षी के है, पहली बार आये हैं। उनका आर्य समाज से कोई सरोकार नहीं है। 29 जुलाई 25 को विवाह संस्कार प्रमाणपत्र व 28 जुलाई 25 को शुद्धि प्रमाणपत्र जारी किया गया है। पता चला कि एक ही पंजीकरण, एक ही पते पर दोनों संस्थान काम कर रहे। सचिव अधिवक्ता हैं तो वह सचिव के रूप में कैसे काम कर रहे। यह धोखाधड़ी है। सचिव ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। दोनों संस्थाओं का गठन 28 जुलाई 24 को किया गया है। ये फर्जी विवाह संस्कार प्रमाणपत्र व शुद्धि प्रमाणपत्र जारी कर रही है। जिसकी वैधता की जांच की जाय।