वैचारिक रणनीतियों के महत्व में लगातार हो रही वृद्धि : राजेंद्र सक्सेना

विहिप काशी प्रांत परिषद शिक्षा वर्ग में प्रचार विभाग की भूमिका पर हुआ मंथन

वैचारिक रणनीतियों के महत्व में लगातार हो रही वृद्धि : राजेंद्र सक्सेना





प्रयागराज, 06 जून । वर्तमान समय बौद्धिक युद्ध का युग है, जिसमें वैचारिक रणनीतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नई तकनीकों और संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सूचनाओं को खंड और ग्राम स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह बातें शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) काशी प्रांत परिषद शिक्षा वर्ग के छठवें दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)के क्षेत्र मार्ग प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना ने कही।

उन्होंने कहा कि किसी भी जन संगठन के लिए उसका प्रचार-प्रसार विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण अंग होता है। यह विभाग संगठन की आंख, कान और नाक बनकर कार्य करता है तथा सूचनाओं के संग्रहण, प्रसारण और गलत सूचनाओं के निराकरण में अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय बौद्धिक युद्ध का युग है, जिसमें वैचारिक रणनीतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नई तकनीकों और संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सूचनाओं को खंड और ग्राम स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन में प्रसिद्धि, नाम छपने या सम्मान पाने की मानसिकता नहीं, बल्कि कर्म को ही सर्वोच्च माना जाता है।

राजेंद्र सक्सेना ने कहा कि इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया के विस्तार ने पूरी दुनिया के विचार प्रवाह को एक मंच पर ला खड़ा किया है। ऐसे में प्रचार विभाग की जिम्मेदारी केवल सूचना प्रसारित करना नहीं, बल्कि समाज, सरकार और मीडिया में चल रहे विषयों पर सही दृष्टिकोण प्रस्तुत करना, सकारात्मक नैरेटिव तैयार करना तथा गलत नैरेटिव का समय पर उत्तर देना भी है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों जैसे ट्विटर (एक्स), फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप के प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही अध्ययनशील, जागरूक और संगठनात्मक सोच विकसित करने पर बल दिया।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत मंत्री डॉ राज राज नारायण सिंह ने कहा कि संगठन सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के लिए कार्य कर रहा है। भारत की धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं के ध्वजवाहक बनकर भावी पीढ़ी को संस्कृति और राष्ट्र के प्रति प्रेरित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने राष्ट्रीय चेतना के दो प्रमुख प्रेरणा स्रोतों केशव बलिराम हेडगेवार तथा माधव सदाशिव गोलवलकर के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला।

शिक्षा वर्ग में कार्यकर्ताओं को योगासन और प्राणायाम का नियमित अभ्यास भी कराया जा रहा है। इस अवसर पर क्षेत्र सत्संग प्रमुख दिवाकर नाथ त्रिपाठी, प्रांत संगठन मंत्री नितिन, प्रांत उपाध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, मुख्य शिक्षक बृजभूषण महेश सिंह, मातृशक्ति सह प्रमुख रचना सिंह, प्रांत सहसंयोजिका शुभांगी सिंह, डॉ. दीपा यादव सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।