दूध-केला से पौष्टिक है मोरिंगा के पत्ते :डॉ. गजेंद्र कुमार
दूध-केला से पौष्टिक है मोरिंगा के पत्ते :डॉ. गजेंद्र कुमार
पूर्वी चंपारण,24 नवंबर ।पताही प्रखंड क्षेत्र के जिहुली पंचायत में इन दिनों स्वास्थ्य को लेकर एक नई जागरूकता लहर देखी जा रही है। गांव में सहजन (मोरिंगा) के पत्तों को लेकर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यह दूध और केला से पौष्टिक है।
सको लेकर जिहुली के प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर गजेंद्र कुमार ने बताया कि सहजन के पत्तों में मौजूद पोषक तत्व इतने अधिक हैं कि सामान्य आहार में मिलना मुश्किल है। उनके अनुसार सहजन के पत्तों में दूध से अधिक कैल्शियम,केले से ज्यादा पोटैशियम और पालक से कई गुना अधिक आयरन पाया जाता है। डॉक्टर गजेन्द्र का कहना है कि यदि ग्रामीण रोजमर्रा के भोजन में थोड़ा-सा सहजन पत्ती शामिल करें, तो कुपोषण, कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्याओं में काफी कमी आ सकती है।
जिहुली पंचायत और आसपास के गांवों में महिलाएँ को सहजन के पत्तों को सुखाकर पाउडर बनाकर अगर बेचती हैं तो उन्हें अतिरिक्त आय भी होगा।
किसानों का कहना है कि सहजन के पेड़ की देखभाल आसान है और लागत भी न के बराबर है, इसलिए इसे पूरक फसल के रूप में भी अपनाया जा सकता है। पताही प्रखंड स्तर पर भी सहजन के उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है, ताकि इस “स्थानीय सुपरफूड” का लाभ हर घर तक पहुंच सके।