काशी - तमिल संगमम में दिखी भाषाई विविधता व सांस्कृतिक समन्वय की झलक स्कूली छात्रों ने सुनीं तमिल लोक कथाएं
काशी - तमिल संगमम में दिखी भाषाई विविधता व सांस्कृतिक समन्वय की झलक स्कूली छात्रों ने सुनीं तमिल लोक कथाएं
वाराणसी, 3 दिसंबर । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में चल रहे काशी-तमिल संगमम् 4.0 के दूसरे दिन भारत के भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समन्वय की झलक दिखी। बुधवार को उत्तर वाहिनी गंगा के किनारे नमोघाट पर आयोजित विशेष एकेडमिक सत्र में कार्यक्रम की थीम “तमिल सीखें – तमिल करकलाम” के तहत स्थानीय छात्रों ने तमिल भाषा और दक्षिण भारतीय लोक-संस्कृति से रूबरू होकर सीखने का नया अनुभव हासिल किया। बच्चों को तमिल भाषा, लोक कथाओं और दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराने के लिए तमिल लोककथाओं का सहारा लिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्वांह 10 बजे लंका इलाके में मारुति नगर कॉलोनी में स्थाित श्री राम पब्लिक स्कूल में हुई। स्कूल के लगभग 30 छात्रों ने विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। सबसे पहले बच्चों को तमिल लोककथा सुनाई गई, जिसमें तमिल संस्कृति की गहराई और नैतिक संदेशों का रोचक ढ़ंग से वर्णन किया गया। इसके बाद नैतिक सोच विकसित करने, गतिविधि के माध्यम से छात्रों में नैतिक चिंतन, मूल्यों की समझ और निर्णय क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा “जादुई पात्र” जिसे मुग्धा शाह ने अत्यंत मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने बच्चों को कहानी और जादुई तत्वों के माध्यम से सीख देने का अनोखा माध्यम प्रदान किया।
इन गतिविधियों का संचालन स्कूल की शिक्षिका कृष्णा आचार्य, पुनीता सिंह, ज्योति पांडेय और शिक्षक शिवम सेठ की देखरेख में किया गया। इसके बाद संत अतुलानंद आवासीय अकादमी, शिवपुर के 11 छात्रों की सहभागिता के साथ कार्यक्रम का दूसरा सत्र शुरू हुआ। यहां 11 बजे से पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय था “वाराणसी के मनोरम घाट” बच्चों ने अपने चित्रों में काशी के प्राचीन घाटों, गंगा की धारा, आध्यात्मिक माहौल और सांस्कृतिक सौंदर्य को रंगों के माध्यम से जीवंत किया। इस सत्र का संचालन शिक्षिका स्वाति सिंह ने किया।