बरेली हिंसा मामले में प्राथमिकी रद्द करने से उच्च न्यायालय का इनकार

बरेली हिंसा मामले में प्राथमिकी रद्द करने से उच्च न्यायालय का इनकार

बरेली हिंसा मामले में प्राथमिकी रद्द करने से उच्च न्यायालय का इनकार

प्रयागराज, 20 नवम्बर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली में सितम्बर में हुई हिंसा मामले से जुड़ी प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

आरोप है कि पुलिस बल पर भीड़ ने ईंट-पत्थरों, पत्थरों और तेजाब की बोतलों से हमला किया था। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने इस निर्देश के साथ याचिका निस्तारित कर दी है कि याची अदनान अन्य कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। अदालत में अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, सहायक महाधिवक्ता पारितोष मालवीय ने कहा कि कानून-व्यवस्था लागू करने वाले पुलिस बल पर हमला,किया गया जिसका काम कानून व्यवस्था कायम रखना है। भयभीत करने की कोशिश की गई।

खंडपीठ को बताया गया कि मौलाना तौकीर रज़ा द्वारा सभा का आह्वान करने के बाद पुलिसकर्मियों पर तेजाब की बोतलों, ईंट-पत्थरों और आग्नेयास्त्रों से हमला किया गया। बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया है। अभियोजन के अनुसार 26 सितम्बर को मौलाना तौकीर रजा ने समुदाय विशेष को इस्लामिया इंटर कॉलेज में इकट्ठा होने का आह्वान किया था। बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, लगभग 200-250 लोगों की भीड़ मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की ओर बढ़ी। हाथों में तख्तियां लिए और भड़काऊ नारे लगाते हुए भीड़ ने पुलिस कर्मियों की चेतावनी और समझाने-बुझाने पर ध्यान नहीं दिया। कुछ ही देर में भीड़ आक्रामक हो गई। पुलिस पर ईंट-पत्थर और तेजाब की बोतलें फेंकी जाने लगी। पुलिस कर्मियों पर गोलियां भी चलाई गईं। कुछ पुलिसकर्मियों के कपड़े फट गए और दो अधिकारी घायल हो गए। हालात यहां तक बिगड़े कि पुलिस बल को आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ीं।

राज्य सरकार का कहना था कि यदि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है। प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध का पता चलता है। हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल और निहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि इस स्तर पर कोई भी अंतरिम राहत जांच में बाधा डाल सकती है। याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अंसार अहमद ने कहा कि अब याची प्राथमिकी रद करने के लिए राहत पर जोर नहीं देना चाहता। परिणामस्वरूप, प्राथमिकी रद्द करने के लिए मांगी गई राहत अस्वीकार कर दी गई।