एससी एसटी का झूठा केस रद्द, धमकाने के केस में अपराध उन्मुक्त करने की अर्जी तय करने का निर्देश

एससी एसटी का झूठा केस रद्द, धमकाने के केस में अपराध उन्मुक्त करने की अर्जी तय करने का निर्देश

एससी एसटी का झूठा केस रद्द, धमकाने के केस में अपराध उन्मुक्त करने की अर्जी तय करने का निर्देश

प्रयागराज, 22 जनवरी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने थाना क्षेत्र कैंट वाराणसी

के विवेक शर्मा व काजल राय के खिलाफ एससी एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5)के तहत आपराधिक केस कार्यवाही रद्द कर दी है। कहा है कि उपलब्ध साक्ष्य एवं शिकायतकर्ता के दर्ज बयान से जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल करने का अपराध नहीं बनता।

हालांकि कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के तहत केस कार्यवाही चलाने तथा याचीगण की अपराध से उन्मुक्त करने की अर्जी दाखिल होने पर अदालत को सबूतों व कानून के तहत आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष चन्द्र शर्मा ने विवेक शर्मा व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची का कहना था कि काजल राय शिकायतकर्ता राजेश कुमार की किरायेदार है। 18 साल के बकाये को लेकर विवाद है। इसलिए झूठा आरोप लगाकर केस दर्ज कराया गया है। याचीगण पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को धमकी दी कि मकान खाली करने के लिए 50 हजार रूपये दे, अन्यथा उसे काजल राय के साथ बलात्कार केस में फंसा देंगे।

याची का यह भी कहना था कि शिकायत कर्ता राजेश कुमार व उनकी भाभी चंपा देवी ने विवेचना के दौरान अपने बयान में जाति सूचक अपशब्द कहने का आरोप नहीं लगाया है। केवल रूपये न देने पर केस में फंसाने की बात कही है। इसलिए एससी एसटी का केस नहीं बनता।

काजल राय के मकान खाली करने के दो महीने बाद धमकी देने की शिकायत की गई है, जबकि वे दोनों ही उस समय घटना स्थल पर नहीं थे, बाहर थे। इसलिए यह आरोप भी निराधार है। इसके बावजूद सीओ जांच अधिकारी ने दंड संहिता व एससी एसटी एक्ट की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की।

याचिका में चार्जशीट सहित पूरी आपराधिक केस कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट केस कार्यवाही रद कर दी और दंड संहिता के अपराध पर याची को अपराध से उन्मुक्त करने की विशेष अदालत में अर्जी देने व उसे तय करने का आदेश दिया है।