पर्यावरण आध्यात्मिकता चिंतन व बात करने का विषय नहीं, समझने का विषय : प्रो. अनिल तिवारी
पर्यावरण आध्यात्मिकता चिंतन व बात करने का विषय नहीं, समझने का विषय : प्रो. अनिल तिवारी
प्रयागराज, 13 फरवरी ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, प्रयागराज में “पर्यावरण और आध्यात्मिकता” विषय पर प्रो. अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि पर्यावरण आध्यात्मिकता केवल चिंतन, बात करने का ही विषय नहीं, बल्कि समझने का विषय है। हमारी समझ के अनुसार हमें सुख और दुःख का अनुभव होता है। उन्होंने जीवन के तीन स्तर बताये। पहला व्यक्तिगत, दूसरा पारिवारिक एवं तीसरा सामाजिक स्तर। शुक्रवार को भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्टडी सर्किल के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में डॉ हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग प्रो. अनिल कुमार तिवारी ने व्यक्तिगत स्तर का उल्लेख करते हुए मानसिक और शारीरिक जीवन के बारे में बताया। पारिवारिक स्तर पर उन्होंने बताया कि परिवार में सदस्यों के बीच तनाव होते हैं, लेकिन सबकी अपनी-अपनी समझ के अनुसार उसे सुलझाना चाहिए। पर्यावरण और आध्यात्मिकता हमारे जीवन की गुणवत्ता और हमारे पर्यावरण से जुड़ी हुई है। आध्यात्मिकता का प्रतिरोधी भौतिकवाद है। उन्होंने गैरेट हार्डी के ट्रेजडी ऑफ कॉमन्स सिद्धांत का उल्लेख करते हुए बताया कि पर्यावरण का नुकसान धनी लोग अधिक करते हैं। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से बताया कि दुनिया के हर व्यक्ति को यदि एक अमेरिकन की जीवनचर्या उपलब्ध करा दी जाये तो सात प्लेनेट की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने विज्ञान और तकनीकी के माध्यम से पर्यावरण का समाधान न बताते हुए आध्यात्मिकता पर जोर दिया। आध्यात्मिक दुःख का अर्थ बताते हुए स्पष्ट किया कि वे दुःख जो मनुष्य को अपने कारण होता है, वे दुःख आध्यात्मिक दुःख हैं। यदि हम ऐसा भोजन करते हैं जिससे हमें रोग ग्रसित होना पड़े तो यह दुःख भी आध्यात्मिक दुःख है। महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. मनोज कुमार दुबे ने बताया कि इसके पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन मंचस्थ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और उनके पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम आदि द्वारा सम्मान से हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय, संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों, विद्वतजनों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने किया। स्वागत वक्तव्य डॉ. शिखा श्रीवास्तव ने और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. अमिता पांडेय ने प्रस्तुत की। संचालन शोधार्थी शालिनी सिंह और आकांक्षा ने और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजिका प्रो. अमिता पांडेय ने किया।