प्राकृतिक संसाधनों से छात्रों ने तैयार किए संचार मॉडल : डॉ. दिवाकर अवस्थी
प्राकृतिक संसाधनों से छात्रों ने तैयार किए संचार मॉडल : डॉ. दिवाकर अवस्थी
कानपुर, 16 जुलाई भविष्य के पत्रकारों के लिए पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषयों को प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाना जरूरी है। दृश्य संचार इसके लिए एक सशक्त माध्यम है। यह बातें गुरुवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने विभाग में आयोजित दृश्य संचार प्रतियोगिता के दौरान कहीं।
विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में बीएजेएमसी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने दृश्य संचार प्रतियोगिता में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर संचार के विभिन्न मॉडलों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में छात्रों ने चार्ट पेपर पर घास, सूखे पत्ते, टहनियां, मिट्टी, जूट की रस्सियां और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग करते हुए संचार सिद्धांतों को रचनात्मक रूप दिया।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और संचार के बीच संबंध को दर्शाते हुए बताया कि प्रकृति स्वयं एक प्रभावी संदेशवाहक है और मनुष्य उसका प्राप्तकर्ता। छात्रों ने अपने मॉडलों के माध्यम से यह भी समझाने का प्रयास किया कि मानवीय हस्तक्षेप से संचार चक्र और प्राकृतिक संतुलन किस प्रकार प्रभावित होता है।
डॉ. दिवाकर अवस्थी ने छात्रों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से जटिल संचार मॉडलों को सरल तरीके से प्रस्तुत करना उनकी रचनात्मक सोच, विषय की समझ और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यावहारिक प्रयोग विद्यार्थियों को जिम्मेदार और संवेदनशील पत्रकार बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
प्रतियोगिता में स्नातक पत्रकारिता के सभी विद्यार्थियों ने समूहों में भाग लिया। निर्णायक मंडल ने छात्रों के नवाचार और पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उपयोग की सराहना करते हुए इसे जनजागरूकता अभियानों के लिए उपयोगी पहल बताया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. होइमावती तालुकदार ने किया। इस अवसर पर डॉ. ओमशंकर गुप्ता, डॉ. योगेंद्र पांडेय, डॉ. जितेंद्र डबराल, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. हरिओम, सागर कनौजिया, प्रेम किशोर शुक्ला सहित विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।