'दृश्यम' का खूनी साया: पुणे में पति ने 'फिल्मी अंदाज' में की पत्नी की हत्या, हुआ गिरफ्तार

'दृश्यम' का खूनी साया: पुणे में पति ने 'फिल्मी अंदाज' में की पत्नी की हत्या, हुआ गिरफ्तार!

मुंबई, 09 नवंबर । अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम' को कौन नहीं जानता, जिसमें एक शख्स अपने परिवार को बचाने के लिए पुलिस को गुमराह करने की एक शातिराना योजना बनाता है। फिल्म ने दर्शकों को खूब मनोरंजन दिया, लेकिन जब काल्पनिक कहानी असल जिंदगी में खूनी मोड़ ले ले, तो उसका अंजाम बेहद भयावह होता है। महाराष्ट्र के पुणे से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक पति ने अपनी पत्नी की हत्या ठीक 'दृश्यम' फिल्म की तर्ज पर करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पैनी नजर से वह बच नहीं पाया और आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गया।

क्या है पूरा मामला?

पुणे के वारजे मालवाड़ी पुलिस स्टेशन की टीम ने इस मामले में आरोपित पति समीर पंजाबराव जाधव को गिरफ्तार किया है। समीर एक व्यवसायी है और फैब्रिकेशन का काम करता है। शिवने इलाके में उसका एक गैराज भी है। उसकी मृत पत्नी अंजलि एक निजी स्कूल में शिक्षिका थी।

शक और फिल्म से मिली प्रेरणा

पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि समीर को अपनी पत्नी अंजलि के चरित्र पर शक था। मोबाइल चैटिंग को लेकर दोनों के बीच अक्सर अनैतिक संबंधों के आरोप-प्रत्यारोप होते थे। इसी शक और आपसी कलह के बीच समीर ने फिल्म 'दृश्यम' और अन्य क्राइम थ्रिलर, चित्र तथा कंदबरा (उपन्यासों) से प्रेरणा लेकर अपनी पत्नी की हत्या की एक बेहद शातिराना योजना बनाई।

खौफनाक वारदात और सबूत मिटाने की साजिश

यह खौफनाक वारदात 26 अक्टूबर को अंजाम दी गई। अपनी योजना के तहत समीर अंजलि को घुमाने के बहाने घर से बाहर ले गया। वह उसे मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग पर शिंदेवाड़ी इलाके के गोगलवाड़ी फाटा के एक गोदाम में ले गया। वहां समीर ने अंजलि का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

इतना ही नहीं, उसने अंजलि के शव को लोहे की भट्टी में जलाकर उसकी राख खेतों में बिखेर दी। सबूत मिटाने के लिए उसने उस लोहे की भट्टी को भी कबाड़ में बेच दिया।

पुलिस को गुमराह करने की कोशिश, लेकिन नहीं मिली कामयाबी

हत्या के बाद समीर ने ठीक फिल्म के नायक की तरह पुलिस स्टेशन में अपनी पत्नी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। वह पुलिस पर अंजलि को ढूंढने का दबाव बनाने लगा और बार-बार अलग-अलग बयान देकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा।

लेकिन पुलिस को समीर की बातों में विरोधाभास और उसके व्यवहार पर शक हुआ। पुलिस ने 26 अक्टूबर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिससे समीर की पोल खुलने लगी। लगातार पूछताछ और सबूतों के सामने समीर आखिर टूट गया और उसने अपना जघन्य अपराध कबूल कर लिया है। पुलिस इस मामले की गहन छानबीन कर रही है।

निष्कर्ष

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अपराध चाहे कितना भी शातिराना क्यों न हो, सच कभी छिपता नहीं। फिल्मी कहानियां मनोरंजन के लिए होती हैं, लेकिन उन्हें असल जिंदगी में उतारने की कोशिश अक्सर दर्दनाक अंत की ओर ले जाती है। शक और अविश्वास से भरे रिश्ते का अंत अक्सर दुखद होता है, लेकिन हत्या जैसा कदम उठाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। कानून की पकड़ से कोई नहीं बच सकता।