सीएसए के वस्त्र एवं परिधान विभाग में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
सीएसए के वस्त्र एवं परिधान विभाग में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
कानपुर, 22 मई। नवाचार और पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार और भौगोलिक संकेतक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आईपी एवं जीआई की जानकारी होना जरूरी है, ताकि उनके कार्य और शोध को उचित पहचान मिल सके।
यह बातें शुक्रवार को ललित अम्बष्ठ ललित अम्बास्था संस्थापक, आईपी अटॉर्नी और रणनीतिकार ने कही। चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के वस्त्र एवं परिधान विभाग में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी) एवं भौगोलिक संकेतक (जीआई) विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ऋतु पाण्डेय द्वारा किया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में आरआईपीए के आईपी अटॉर्नी ललित अम्बष्ठ उपस्थित रहे। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार, पेटेंट, कॉपीराइट एवं भौगोलिक संकेतकों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को नवाचार तथा पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण में आईपी एवं जीआई की भूमिका से अवगत कराया।
इस अवसर पर सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर, खाद्य एवं पोषण विभाग की डॉ. विनीता सिंह, वस्त्र एवं परिधान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह तथा टीचिंग एसोसिएट डॉ. अंकिता यादव मौजूद रहीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा बौद्धिक संपदा से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नवाचार, अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।