कृषि वैज्ञानिकों की सलाह : किसान धनिया की खेती से बढ़ाएं आमदनी कम लागत में अधिक लाभ की सम्भावना

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह : किसान धनिया की खेती से बढ़ाएं आमदनी कम लागत में अधिक लाभ की सम्भावना

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह : किसान धनिया की खेती से बढ़ाएं आमदनी  कम लागत में अधिक लाभ की सम्भावना

झांसी, 14 नवम्बर। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों को धनिया (धना) की खेती अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि धनिया मसाला बीजीय समूह की प्रमुख फसल है, जिसकी खेती उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार में बड़े पैमाने पर की जाती है। बुंदेलखंड क्षेत्र की चिकनी व दोमट मिट्टी जाड़े के मौसम में धनिया उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है।

डॉ. सिंह ने बताया कि काली चिकनी मिट्टी में पैदा हुआ धनिया विशेष सुगंध और गुणवत्ता वाला होता है। हरी पत्तियों के लिए फसल 40–45 दिन में तैयार हो जाती है, जिसमें प्रति हेक्टेयर 18–20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है और लगभग 50–60 क्विंटल हरी धनिया की उपज प्राप्त की जा सकती है।

धनिया की प्रमुख किस्मों में अजमेर धनिया-1, अजमेर धनिया-2, राजस्थान धनिया-435, राजस्थान धनिया-436 और अर्का ईशा शामिल हैं। इनमें अजमेर धनिया-1 सफेद चूर्णिता रोग के प्रति प्रतिरोधी हैं और इसे हरी पत्तियों व दानों दोनों के लिए उगाया जा सकता है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बुवाई के 12–15 दिन बाद पहली सिंचाई अवश्य करें और खेत में जलभराव न होने दें। माहू कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एससी की 250–300 मिलीलीटर मात्रा को 200–250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। दाने वाली फसल के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30–35 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10–15 सेमी रखनी चाहिए। उचित देखभाल से किसान 115–120 दिनों में 12–15 क्विंटल दाने की उपज प्राप्त कर सकते हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि यदि धनिया की बुवाई 20 नवम्बर तक की जाए, तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने बताया कि यह फसल कम लागत में तैयार होती है और किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का लाभकारी विकल्प बन सकती है।