पशुधन मंत्री ने 11 जिलाें में 14 नवनिर्मित वृहद गोसंरक्षण केन्द्रों का किया वर्चुअल लोकार्पण, गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन की अपील

-प्रत्येक केन्द्र में 400 गोवंश के संरक्षण की क्षमता, गौसंरक्षण केंद्रों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं -राज्य सरकार गोआश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है : कृष्णा पासवान

पशुधन मंत्री ने 11 जिलाें में 14 नवनिर्मित वृहद गोसंरक्षण केन्द्रों का किया वर्चुअल लोकार्पण, गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन की अपील

लखनऊ, 27 जुलाई। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने साेमवार काे पशुपालन निदेशालय में आयोजित एक कार्यक्रम में निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए प्रदेश के 11 जनपदों के 14 नवनिर्मित वृहद गो संरक्षण केन्द्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इसके तहत जनपद अमेठी में 04 तथा जनपद चन्दौली, गाजीपुर, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर, प्रयागराज, अलीगढ़, प्रतापगढ़, बाराबंकी एवं शाहजहांपुर में एक-एक वृहद गो संरक्षण का शत-प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक केंद्र में लगभग 400 गोवंश को संरक्षित किया जा सकता है।



उन्हाेंने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके समुचित भरण-पोषण हेतु निरंतर कार्य कर रही है। वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना से न केवल गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि उनके लिए चारा, पानी, चिकित्सकीय सुविधाएं एवं स्वच्छ वातावरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

वर्तमान में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में 5,517 अस्थायी गो आश्रय स्थल, 507 वृहद गो संरक्षण केन्द्र, 213 कांजी हाउस एवं शहरी क्षेत्र में 273 कान्हा गो आश्रय स्थल सहित कुल 6,510 गो आश्रय स्थलों में 11.75 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत 1,11,047 इच्छुक लाभार्थियों को 1.79 लाख निराश्रित गोवंश सुपुर्द किये गये हैं। प्रदेश सरकार द्वारा सहभागिता योजनान्तर्गत सुपुर्द गोवंशों तथा गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों के भरण-पोषण पर प्रतिदिन लगभग धनराशि 6.5 करोड़ रुपये व्यय किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 632 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी, जिसके सापेक्ष 507 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा 480 वृहद गो संरक्षण केन्द्र क्रियाशील किये जा चुके हैं। प्रत्येक वृहद गो संरक्षण केन्द्र की गोवंश धारण क्षमता 400 गोवंश तथा इकाई निर्माण लागत 160.12 लाख रुपये है। सरकार द्वारा 632 वृहद गो संरक्षण केन्द्र के निर्माण हेतु धनराशि रूपये 8336.60 करोड़ अवमुक्त की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राविधानित 100 करोड़ रुपये के सापेक्ष 53.78 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है।

कार्यक्रम में धर्मपाल सिंह ने कहा कि गो संरक्षण कार्यों में स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए। गौसंरक्षण केंद्रों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए। मंत्री ने जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की कि वे इन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के ़संचालन में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि गो संरक्षण के इस अभियान में सहयोग प्रदान करें। उन्हाेंने पशुपालन विभाग के सोशल मीडिया सेल का भी औपचारिक रूप से उद्घाटन किया और विभाग की समस्त योजनाओं एवं गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित एवं प्रसारित करने के भी निर्देश दिये।

कार्यक्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री कृष्णा पासवान ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गो आश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाने हेतु बहुआयामी प्रयोग किये जा रहे हैं। गाय के गोबर से गो दीप, धूपबत्ती, गोलॉग, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट तथा सी0बी0जी0 उत्पादन इकाईयोें की स्थापना की जा रही है। इन इकाईयों के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा महत्वपूर्ण योगदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुकेश कुमार मेश्राम, अपर मुख्य सचिव, पशुधन ने कहा कि इन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिनमें पर्याप्त भूसा भंडारण, हरा चारा उत्पादन, स्वच्छ पेयजल तथा पशु चिकित्सा सेवाएं जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। प्रदेश के वृहद गो संरक्षण केन्द्रों तथा अन्य गो आश्रय स्थलों के संचालन में एनजीओ/एफपीओ/स्वयं सहायता समूहों एवं कारपोरेट फर्मों की भी भागीदारी सुनिश्चित करायी जा रही है।

कार्यक्रम में देवेन्द्र कुमार पाण्डेय विशेष सचिव, पशुधन, डा0 राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक, प्रशासन एवं विकास, डा0 संगीता तिवारी, रोग नियत्रंण एवं प्रक्षेत्र, डा0 प्रमोद कुमार, अपर निदेशक तथा संबंधित जनपदों के जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा वर्चुअल मोड में सम्पन्न लोकार्पण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया।