पर्यटन की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित : जयवीर सिंह
पर्यटन की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित : जयवीर सिंह
लखनऊ, 27 जुलाई । उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को कहा कि परियाेजनाएं अब कागज पर प्रस्तावों के आधार पर मंजूर नहीं होंगी। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। जनता का पैसा केवल उन योजनाओं पर खर्च होगा, जिसका असर जमीन पर साफतौर से देखा जा सके। निर्माण कार्य की हर चरण में निगरानी होगी। चयन से लेकर परियोजना पूरी होने तक जवाबदेही तय की जायेगी। विलम्बित परियोजनाओं को हरहाल में आगामी नवम्बर तक पूरा कराया जायेगा।
प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सेक्टर के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर अवस्थापना सुविधाओं के सृजन एवं विकास के लिए 119841.10 लाख रुपये की 575 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके तहत जनपद आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की परियोजना का क्यूरेशन कार्य, जनपद लखनऊ में नवसेना शौर्य संग्रहालय का क्यूरेशन कार्य कराया जा रहा है। इसी प्रकार जनपद फर्रूखाबाद के संकिसा में महोबा में प्लेनिटोरियम का कार्य, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में वेदारण्यम की स्थापना का कार्य, जनपद फिरोजाबाद के समौर बाबा धाम, करहरा हेतु पार्किंग पर्यटन सुवधिा केन्द्र तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं का सृजन किया जा रहा है।
इसी प्रकार बलिया में महर्षि भृगु आश्रम, जनपद बस्ती में भदेश्वर नाथ मन्दिर का पर्यटन विकास, बिजनौर में विदुर कुटी स्थल, कन्नौज में मेंहदी घाट, जनपद कासगंज के सोरों तीर्थ क्षेत्र में पवित्र कुण्ड स्थित घाट का पुर्नविकास एवं सौन्दर्यीकरण, जनपद मथुरा में परिक्रमा मार्ग, मेरठ में हस्तिनापुर का समेकित पर्यटन विकास तथा जनपद संतकबीरनगर में स्थित तामेश्वरनाथ मन्दिर का पर्यटन विकास कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बरेली, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, झांसी, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, विंध्याचल, प्रयागराज, चित्रकूट, अलीगढ़ आदि मण्डलों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि योजनाओं की उपयोगिता और जनहित का आकलन किया जाए। इसके बाद योजनाओं की स्वीकृति दी जायेगी। इसका वास्तविक लाभ आम जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने आगरा और अलीगढ़ मण्डल की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि अब कोई भी परियोजना केवल प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत नहीं होगी बल्कि हर योजना को ठोस तथ्यों की कसौटी पर परखा जायेगा। प्रत्येक प्रस्ताव के साथ भूमि अभिलेख स्थल के नवीनतम फोटोग्राफ, व्यावहारिक लागत का आकलन तथा ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के परिणाम अनिवार्य होंगे।