असफलता से सीखकर आगे बढ़ें युवा, पढ़ने और कौशल विकास पर दें ध्यान: तरनजीत सिंह संधू
लखनऊ विश्वविद्यालय में गोमती पुस्तक महोत्सव के दौरान दिल्ली के उपराज्यपाल ने छात्रों से किया संवाद; कहा—तकनीक सहायक हो सकती है, लेकिन सोच और निर्णय क्षमता उस पर निर्भर न हों।
लखनऊ, 17 सितंबर। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने गुरुवार काे युवाओं को असफलताओं से सीखते हुए निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव में एक विशेष सत्र ‘कूटनीति से नेतृत्व तकः राष्ट्र सर्वाेपरि‘ में छात्रों से संवाद किया।
गुरुवार काे आयाेजित इस कार्यक्रम में उपराज्यपाल ने कहा कि जीवन में असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। पढ़ने की आदत, कौशल विकास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना से युवा देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकते हैं। तकनीक आज जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। तकनीक सहायता का माध्यम हो सकती है, लेकिन अपनी सोच और निर्णय लेने की क्षमता को पूरी तरह उस पर निर्भर नहीं करना चाहिए। भारत की युवा आबादी देश की महत्वपूर्ण शक्ति है। इस क्षमता को सही अवसरों और कौशल से जोड़कर देश की वैश्विक भूमिका को और मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में पढ़ने के लिए समय निकालना चुनौती बनता जा रहा है, ऐसे में पुस्तकों का महत्व और बढ़ जाता है। गोमती पुस्तक महोत्सव केवल पुस्तकों और साहित्य का मंच नहीं, बल्कि नए विचारों, विद्वानों और समाज को दिशा देने वाले संवाद का मंच भी है। पढ़ना व्यक्ति को सूचना देने के साथ-साथ सोचने, समझने और नए विचार विकसित करने की क्षमता प्रदान करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के गायन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने सरदार तरनजीत सिंह संधू और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जयप्रकाश सैनी का शॉल ओढ़ाकर एवं पुस्तकें भेंट कर स्वागत किया।