राधा-कृष्ण रूप सज्जा में नन्हे बच्चों ने मोहा मन, डॉ. मुरारजी त्रिपाठी बोले- संस्कारों से ‘नर से नारायण’ बनने की राह

कटघर के सरस्वती शिशु विद्या निकेतन में राधा-कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता आयोजित हुई। बच्चों ने कृष्ण-सुदामा मिलन और कुब्जा प्रसंग समेत विभिन्न झांकियों व नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

राधा-कृष्ण रूप सज्जा में नन्हे बच्चों ने मोहा मन, डॉ. मुरारजी त्रिपाठी बोले- संस्कारों से ‘नर से नारायण’ बनने की राह

प्रयागराज, 10 सितंबर । बच्चों में संस्कार, राष्ट्रीयता तथा धर्म और संस्कृति के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति का भाव जागृत कर उन्हें नर से नारायण बनाने में कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता सशक्त माध्यम है। धर्म के बिना नैतिकता और सदाचार की कल्पना नहीं की जा सकती। यह बातें सरस्वती शिशु विद्या निकेतन, कटघर में आयोजित राधा-कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में मुख्य वक्ता एवं प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने कहीं।

प्रतियोगिता में नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के विभिन्न बाल रूप धारण कर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की प्रस्तुतियों से विद्यालय का पूरा प्रांगण वृंदावन जैसा प्रतीत होने लगा। ‘छलिया का वेश बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया’ गीत पर बच्चों के समूह नृत्य तथा ‘छोटी-छोटी गइया, छोटे-छोटे ग्वाल’ पर नन्हे बच्चों के मनमोहक नृत्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में कृष्ण-सुदामा मिलन की झांकी और कुब्जा को फल बेचते हुए की प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं को जीवंत कर दिया।

मुख्य वक्ता डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने कहा कि विद्या भारती बालकों के मन में राष्ट्रीयता तथा देश के महापुरुषों के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत कर उन्हें संस्कारवान बनाने के लिए संकल्पित है। ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. अंकिता मौर्य ने कहा कि कृष्ण रूप हमें कर्मयोग और राधा रूप समर्पण का संदेश देता है। यही दोनों सूत्र जीवन को सफल बनाने में सहायक हैं। बच्चों को बचपन से ही अपनी संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है।

डॉ. अनुपमा ने प्रतियोगिता में शामिल बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की। अनीता सोनकर ने कहा कि विद्यालय संस्कारों का केंद्र है, जहां बच्चों की प्रतिभा को निखारने का कार्य किया जाता है। प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चों को विद्यालय की ओर से पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रधानाचार्य कमलेश मिश्रा ने अतिथि परिचय कराया। प्रबंधक अरुण कुमार जायसवाल ने आभार व्यक्त किया। पूर्व छात्र सक्षम ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।