शादी के झांसे में दुष्कर्म केस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, पूर्व इंस्पेक्टर के खिलाफ पूरी कार्यवाही रद्द

हाईकोर्ट ने कहा कि शादी का वादा अपने आप में दुष्कर्म का आधार नहीं बनता; अपराध साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि वादा शुरू से ही झूठा था और सहमति उसी आधार पर ली गई थी।

शादी के झांसे में दुष्कर्म केस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, पूर्व इंस्पेक्टर के खिलाफ पूरी कार्यवाही रद्द

प्रयागराज, 30 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोपों में घिरे उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर अमित कुमार के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने यह आदेश दिया।

मथुरा के कोसी कलां की रहने वाली एक युवती ने 8 जनवरी 2020 को वाराणसी के महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि 2013 में कोसी कलां में तैनात रहे इंस्पेक्टर अमित कुमार ने शादी का प्रस्ताव रखा और अपनी पहली शादी छिपाई। युवती के मुताबिक सितंबर 2019 में उसे वाराणसी के एक होटल में बुलाकर मिल्क शेक में नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया गया, अश्लील फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराया गया। धमकी देने के भी आरोप थे।

पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया था। इसी आरोपपत्र और तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी की अदालत में लंबित केस को रद्द कराने के लिए अमित कुमार ने हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। अदालत ने कहा कि शादी के वादे पर बने हर संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि वादा शुरू से ही झूठा था और महिला की सहमति केवल उसी वादे के आधार पर ली गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि युवती 27 वर्ष की शिक्षित वयस्क है और 2013 से आरोपित को जानती थी। वह बिना किसी को बताए अकेले विमान से वाराणसी गई और होटल के कमरे में रुकी। इसके बाद भी उसने कोई शिकायत नहीं की और आरोपित के संपर्क में रही। वह आरोपित के मेरठ स्थित पैतृक घर भी गई, वहां भी कोई शिकायत नहीं की। व्हाट्सएप चैट में युवती ने खुद लिखा कि वह आरोपित के तलाक तक इंतजार करेगी। इससे कोर्ट ने माना कि उसे आरोपित की पहली शादी की जानकारी थी।

फोटो में युवती आरोपित के साथ खुश दिख रही है

जांच में ब्लैकमेलिंग के आरोप वाले कथित अश्लील फोटो-वीडियो न तो पेश किए गए और न ही जांच अधिकारी बरामद कर पाए। आरोपित ने शादी से कभी इनकार नहीं किया। उसका पहली पत्नी से तलाक 14 दिसंबर 2023 को मेरठ की पारिवारिक अदालत से मंजूर हुआ। कोर्ट ने आरोपित के इस पक्ष को भी दर्ज किया कि मुकदमा उसकी पहली पत्नी के उकसावे पर दर्ज कराया गया। साथ ही यह तथ्य भी रेखांकित किया कि आरोपित के पूरक हलफनामे के अनुसार युवती की बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी हो चुकी है, जिसकी जानकारी सुनवाई के दौरान अदालत को नहीं दी गई थी।

राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने कहा था कि पीड़िता का बयान स्पष्ट और एकरूप है और आरोपित ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोपित को 24 से अधिक आपराधिक मामलों वाला बताया और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए। आरोपित के वकील ने जवाब में कहा कि ये दलीलें केवल चरित्र पर केंद्रित हैं, मामले के गुण-दोष पर नहीं। उच्च न्यायालय ने माना कि आरोपित के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में, जहां कोई आपराधिक दायित्व तय नहीं होता, कार्यवाही जारी रखना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसके साथ ही आरोपपत्र और पूरी कार्यवाही रद्द कर दी गई और अर्जी मंजूर हो गई।