विश्वविद्यालय केवल उपाधि देने के केंद्र नहीं, ज्ञान, नवाचार और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के केंद्र हैं : कर्नल विनय कुमार

मुक्त विश्वविद्यालय में उल्लास के साथ मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, नशामुक्त भारत अभियान के विजेताओं और पूर्व सैनिकों का सम्मान

विश्वविद्यालय केवल उपाधि देने के केंद्र नहीं, ज्ञान, नवाचार और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के केंद्र हैं : कर्नल विनय कुमार

प्रयागराज, 15 अगस्त । विश्वविद्यालय केवल उपाधियां प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ऐसे ज्ञान केंद्र हैं जहां नए विचार जन्म लेते हैं, प्रतिभाओं को विकसित होने का अवसर मिलता है और वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण का निर्माण होता है। उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को ज्ञान और कौशल के साथ अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के संस्कार भी दें।

यह बात उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में कही।

प्रभारी कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह के निर्देश पर कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद वंदे मातरम् और राष्ट्रगान की प्रस्तुति हुई। विश्वविद्यालय परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों और देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों को नमन किया।

कर्नल विनय कुमार ने कहा कि भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्रांति, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्टार्टअप, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की युवा शक्ति अपनी प्रतिभा और परिश्रम से विश्व पटल पर भारत का गौरव बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। अनेक भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता की भावना देशवासियों को एक सूत्र में बांधती है। विश्वविद्यालय परिवार को देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और पारस्परिक सम्मान को मजबूत करने में योगदान देना चाहिए।

नशामुक्त भारत अभियान के विजेता सम्मानित स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर राज्यपाल सचिवालय के निर्देश पर विश्वविद्यालय में चलाए गए नशामुक्त भारत अभियान पखवाड़े के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। भाषण प्रतियोगिता में शोध छात्र संजय सिंह ने प्रथम, कमल किशोर ने द्वितीय और प्रीति ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में दिग्विजय सिंह प्रथम, ज्योति गुप्ता द्वितीय और आशीष पटेल तृतीय रहे। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना नशामुक्त भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। शिक्षण संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों में नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता पैदा कर इसका संदेश परिवार और समाज तक पहुंचाया जा सकता है। विश्वविद्यालय की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान राष्ट्र की रक्षा और सेवा में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि सैनिकों का त्याग, अनुशासन, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण युवा पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

नुक्कड़ नाटक से दिया नशामुक्त समाज का संदेश

समारोह का प्रमुख आकर्षण नशामुक्त भारत अभियान की टीम द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय और संवादों के माध्यम से नशे के कारण व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को सामने रखा। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि नशा केवल व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या है। इसके खिलाफ परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर जागरूकता का वातावरण तैयार करना होगा। प्रस्तुति में शामिल सभी कलाकारों को विश्वविद्यालय की ओर से पुरस्कृत किया गया।

योग और शांति पाठ से दिया स्वस्थ जीवन का संदेश

समारोह में योग प्रशिक्षकों ने योगाभ्यास और शांति पाठ कराया। इसके माध्यम से स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और नशामुक्त जीवन का संदेश दिया गया। योग प्रशिक्षकों ने कहा कि योग व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह ने विश्वविद्यालय परिवार में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक जीवन के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए विश्वविद्यालय परिवार ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा तथा अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि समारोह में शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरा परिसर देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव की भावना से ओतप्रोत रहा।

इस अवसर पर वित्त अधिकारी, निदेशक, आचार्य, सहायक आचार्य, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।