महाकुम्भ भगदड़ : हाईकोर्ट ने कहा, मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, न्यायिक आयोग नहीं

"महाकुम्भ भगदड़: पीड़ितों को राहत के लिए अब और इंतज़ार नहीं, इनक्वेस्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को ही माना जाएगा आधार"

महाकुम्भ भगदड़ : हाईकोर्ट ने कहा, मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, न्यायिक आयोग नहीं

प्रयागराज, 30 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जनवरी 2025 के महाकुम्भ मेला भगदड़ मामले में स्पष्ट किया है कि पीड़ितों को अनुग्रह मुआवजा देने के दावों का निपटारा राज्य द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ संजय कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या) को हुई भगदड़ में उनके रिश्तेदार की मौत पर मुआवजा मांगा गया था।

अदालत ने न्यायिक जांच आयोग के सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे का अवलोकन करते हुए कहा कि मुआवजा दावों का निपटारा करना आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। आयोग का कार्य केवल घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच करना, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के सुझाव देना और प्रशासनिक समन्वय की समीक्षा करना है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने भगदड़ की घटना से इनकार नहीं किया और कुछ मृतकों के आश्रितों को पहले ही मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई। ऐसे में आयोग द्वारा यह जांच करना कि भगदड़ हुई या नहीं, आवश्यक नहीं है।

प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए अदालत ने निर्देश दिए कि सभी मुआवजा दावे जिला प्रशासन-मेलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं, जहां प्रत्येक मामले में मृत्यु या क्षति के तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा। पुलिस की इनक्वेस्ट रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को, जब तक विपरीत साक्ष्य न हो, प्रमाणिक माना जाएगा। साथ ही, मेलाधिकारी को प्रत्येक दावे पर 30 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा।

वर्तमान मामले में अदालत ने पाया कि मृतक की इनक्वेस्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उपलब्ध हैं और विवादित नहीं हैं। इसलिए कोर्ट ने मेलाधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने और 07 मई तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।