फसल अवशेष जलाने के बजाय खेत में सड़ाकर खाद बनाएं किसान: डॉ. दीपक मिश्रा
कानपुर में 21 से 25 सितंबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने की दी जा रही जानकारी।
कानपुर, 21 सितंबर । फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में सड़ाकर खाद के रूप में इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। किसानों को फसल अवशेषों में आग लगाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक होना चाहिए। यह बातें सोमवार को डॉ. दीपक मिश्रा ने कही।
कृषि विज्ञान केंद्र दलीप नगर की ओर से चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन फसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 21 से 25 सितंबर तक चलने वाले प्रशिक्षण में किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है।
डॉ. खलील खान ने बताया कि अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं इससे अधिक प्रभावित होती हैं। उन्होंने बताया कि जिले में धान और गेहूं का फसल चक्र प्रमुख होने के कारण बड़ी मात्रा में अवशेष निकलते हैं। इन्हें जलाने से मिट्टी के सूक्ष्म जीवाणु नष्ट होते हैं, जिससे मृदा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक डॉ. राजेश राय ने किया। वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार सिंह के अलावा प्रगतिशील किसान छुन्ना लाल, राजेंद्र कुमार, राहुल कुमार और राजमणि समेत करीब 30 किसानों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।